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चीनी मिलें भी बनाएँगी बिजली

कैबिनेट ने ऊर्जा नीति-2009 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब यूपी में बिजलीघर लगाने वाली कंपनियों को बेचे जाने योग्य बिजली में से यूपी को अनिवार्य रूप से 50 फीसदी बिजली देनी होगी। प्रदेश सरकार ने बिजलीघर लगाने की शर्तो को आकर्षक बनाने के लिए ऊर्जा नीति में संशोधन किया है।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में ऊर्जा टास्क फोर्स द्वारा सिफारिश की गई कि एमओयू से स्थापित की जाने वाली बिजली परियोजनाओं में यदि राज्य सरकार ईंधन की आपूर्ति के लिए केंद्र से सिफारिश करेगी तो बिजलीघर लगाने वाली कंपनी अधिकतम 50 फीसदी बिजली राज्य को उपलब्ध कराएगी।

पहले इस शर्त पर 90 फीसदी बिजली देने की बाध्यता थी। ऊर्जा नीति 2009 में को-जनरेटर को ऑफ सीजन में कोयले या गैस से बिजली उत्पादन की छूट इस आधार पर दिए जाने का प्रावधान किया गया था कि वे कम से कम 50 फीसदी राज्य सरकार को बेचेंगे।

उसे बिजली नियामक आयोग द्वारा निर्धारित दरों पर यह बिजली बेचनी होगी। कुछ चीनी मिलों ने उनके पास उपलब्ध भूमि का उपयोग करके पूरे वर्ष विद्युत उत्पादन के लिए कोयला-गैस आधारित स्वतंत्र विद्युत परियोजनाएँ एमओयू पद्धति पर स्थापित करने में रुचि दिखाई है।

पूरे वर्ष विद्युत उत्पादन के लिए को-जनरेटर को स्वतंत्र विद्युत उत्पादन इकाई स्थापित करने की सुविधा प्रदान किए जाने के लिए ऊर्जा नीति में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। ऐसी बिजली उत्पादन परियोजनाओं की अधिकतम क्षमता 100 मेगावाट से अधिक नहीं होगी। जिन क्षेत्रों में भूगर्भ जल दोहन वजिर्त है, उन क्षेत्रों में परियोजनाएँ स्थापित नहीं की जाएँगी।

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