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पिता ने बच्चों को दिया मौत का वायरस

असुरक्षित यौन संबंध बनाने की लापरवाही ने पूरे परिवार को मौत की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। पहला बच्चा होने के बाद पिता ने यह गलती की, नतीजतन मां और उसके बच्चों को एचआईवी का वायरस मिल गया।

छह साल होने के बाद कराई गई जांच में बच्चों में एचआईवी की पुष्टि हुई है। बच्चों का जीवन एचआईवी के उपचार एंटी रेट्रो वायरल थेरेपी पर निर्भर है। पहला बच्चा जानलेवा वायरस के संक्रमण से आजाद है।

मोरना निवासी इस बच्चे में दिसंबर में एचआईवी की पुष्टि हुई है। यह बच्चा छह साल का है और इसका बड़ा भाई एचआईवी से मुक्त है। एचआईवी, एड्स की परामर्शदाता नीता भारद्वाज ने कहा एचआईवी के मरीजों की जानकारी गुप्त रखी जाती है इसलिए सारी जानकारियों का खुलासा नहीं किया जा सकता है।

बताया सिर्फ इतना जा सकता है कि पिता की काउंसलिंग के दौरान पता चला कि मां और बाप दोनों की एचआईवी संक्रमित हैं। गहराई से जानकारी लेने पर पिता ने बताया कि शादी के बाद पहले बच्चों से पहले पिता को एचआईवी कासंक्रमण नहीं था।

यही वजह है कि पहला बच्चा वायरस से सुरक्षित है। इसके बाद पिता किसी के साथ लिप्त हो गया और परिणाम स्वरूप उसे एचआईवी का संक्रमण मिल गया। हालांकि पिता का कहना है कि अस्पताल में गलत सिरिंज के उपयोग से ऐसा हुआ है।

परामर्शदाता का कहना है कि अधिकतर मरीज सिरिंज पर ही आरोप लगाते हैं लेकिन बातचीत के दौरान इस बात का खुलासा हो जाता है कि उन्हें एचआईवी कैसे हुआ है। नीता भारद्वाज ने कहा कि पिता की काउंसलिंग जारी नहीं हो सकी हैं क्योंकि दुबारा वह अस्पताल आया ही नहीं है।

उन्होंने कहा कि अभिभावकों की यह जिम्मेदारी बनती है कि उन्हें डॉक्टरी सलाह से शारीरिक संबंध बनाना चाहिए। साथ ही काउंसलिंग और दवाओं से मरीजों को बिल्कुल भी परहेज नहीं करना चाहिए।

 

 

 

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