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रूचिका के पिता ने कहा: राठौर और प्रशासन जिम्मेदार

उन्नीस साल तक गम और गुस्से को अपने सीने में दबाए रुचिका के पिता एससी गिरहोत्र ने गुरुवार को चुप्पी तोड़ी। अपनी बेटी के साथ हुई बदसलूकी और फिर उसके आत्महत्या की घटना को याद कर आंसू छलक पड़े।

बैंक से सेवानिवृत्त प्रबंधक गिरहोत्र ने पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला और हरियाणा प्रशासन पर बेटी को प्रताड़ना के बाद आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया।

पहली बार मीडिया के सामने आए रुचिका के पिता ने कहा कि उनका परिवार अब भी हरियाणा के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एस. पी. एस. राठौर और उसकी मदद करने वाले सिस्टम से खौफजदा है। बेटी गंवाने वाले गिरहोत्र ने कहा कि उनके परिवार को अंडरग्राउंड रहने के लिए मजबूर किया गया।

गिरहोत्र ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला सभी गलत कामों से राठौर को बाहर निकाल लेते थे। आर. आर. सिंह (1990 में हरियाणा के डीजीपी) ने रिपोर्ट में राठौर के खिलाफ मामला दर्ज करने का सुझाव देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की।

उन्होंने कहा,"मेरी बेटी संग दुर्व्यवहार हुआ, प्रताड़ित किया गया और मरने के लिए मजबूर किया गया था। मेरे बेटे आशु को भी परेशान किया गया और झूठे मामलों में फंसाया गया। पंचकूला छोड़ने के बाद शिमला और अन्य जगहों पर हम जहां भी गए राठौर ने हमारा पीछा किया।"

सीबीआई की विशेष अदालत ने सोमवार को राठौर को दोषी ठहराते हुए उन्हें छह महीने की कैद व 1,000 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई थी। रुचिका की मित्र आराधना के अभिभावकों आनंद और मधु प्रकाश के निवास पर गिरहोत्र ने कहा कि हम परिवार के लिए सुरक्षा चाहते हैं। उनका परिवार केवल छह महीने की कैद की सजा मिलने से बहुत आहत है। गौरतलब है कि 12 अगस्त, 1990 की घटना के बाद से आनंद और मधु ही मुकदमा लड़ रहे हैं। 

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