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विभाग से दो कदम आगे दलाल

आरटीओ डाल-डाल तो दलाल पात-पात। यह कहावत यहां के परिवहन विभाग में चरित्रार्थ हो रही है। लाइसेंस बनाने का पूरा ठेका दलालों के पास है। जैसे ही कोई युवक लाइसेंस बनवाने आता है, दलाल का गिरोह सक्रिय हो जाता है। विभाग की तमाम कोशिशों के बाद भी इस पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।

दलालों के सक्रिय नेटवर्क के आगे पूरा विभाग परेशान है। दलालों को हटाने के लिए आरटीओ की ओर से आस-पास दुकानें हटा दी गई थी। दलालों की शिकायतें आने पर विभाग ने अभियान चला कर इनका सारा सामान जब्त कर लिया था। कुछ दिन तो दलाल दफ्तर के पास नहीं फटके। लेकिन यह प्रयास भी टांय-टांय फिस्स हो गया।

मामला शांत होने पर दोबारा इन लोगों ने द़ुकानें सजा लीं। फिर से शिकायतें मिलने पर आरटीओ ने दफ्तर के आस-पास बाड़ लगा कर प्लांटेशन कर दिया। लेकिन दलालों की गतिविधियां नहीं रूकी। आरटीओ से कुछ दूरी पर चाय-पान की दुकानों पर दलाल लाइसेंस बनवाने वालों को पकड़ लेते हैं। रुपए-पैसे कालेन देन दुकान पर ही तय हो जाता है। आवेदक के फार्म आदि वहीं पर भर दिए जाते हैं। अगर लगता है कि विभाग के कोई अधिकारी हैं तो दलाल मौके से फरार हो जाते हैं।

एआरटीओ कमल गुप्ता ने बताया कि दलालों को हटाने के लिए लगातार अभियान चलाया जाता है। अगर कोई आवेदक भी सूचना देता है, उस पर भी कार्रवाई की जाती है। लोगों को आगाह भी किया जाता है कि दलालों के चक्कर में ना पड़ें।

 

 

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