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विदेश भेजने के नाम पर ठगी करने वाला गिरोह पकड़ा

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कबूतरबाजी के धंधे में लिप्त एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश किया है।पुलिस ने गिरोह के सरगना समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए जालसाजों में स्पेनिश मूल का एक नागरिक भी शामिल है। उसके जरिये ही स्पेन एंबेसी से वीजा लगवाने का फर्जीवाड़ा होता है।

विदेश भेजने के नाम पर ठगी करने वाला यह गिरोह पिछले पांच साल से इस कबूतरबाजी का धंधा कर रहा था। इस गिरोह के निशाने पर खासतौर से पंजाब के ग्रामीण इलाके के युवक होते हैं।

गिरफ्तार आरोपियों में लाजपत नगर निवासी आनंद मलकानी, राजौरी गार्डन निवासी उपकार सिंह, मोतिया खान निवासी मैक्सोन टीटू, पटेल नगर निवासी सतीश रत्तू व स्पेनिश नागरिक गेरारडो मोरंटे मेंडेज शामिल हैं। गेरारडो गुड़गांव में रहता है। पुलिस के मुताबिक उसके स्पेन एंबेसी में डिप्लोमेट से करीबी रिश्ते हैं। फर्जीवाड़े में वह अपने इस रिश्ते का इस्तेमाल करता है।

गिरोह का सरगना है आनंद मलकानी। वह दिल्ली विश्वविद्यालय का ग्रेजुएट है। उपकार फर्जी दस्तावेज तैयार करता है। मैक्सोन टीटू ने अशोक यात्री निवास से वीआरएस लेकर इस गिरोह को ज्वाइन किया था। वह पंजाब में लोगों को झांसे में लेता था। सतीश को पटियाला पुलिस इसके पहले भी गिरफ्तार कर चुकी है।

दिल्ली पुलिस के पीआरओ राजन भगत ने बताया कि क्राइम ब्रांच की स्पेशल ऑपरेशन स्क्वॉड-एसओएस यूनिट को सूचना मिली थी कि आनंद व उपकार नाम के दो व्यक्ति कबूतरबाजी के नाम पर ठगी कर रहे हैं। सूचना के आधार पर एसीपी उदयवीर सिंह राठी की टीम ने लाजपत नगर इलाके में स्थित हल्दीराम सर्विस रोड पर फर्जी दस्तावेजों का अदान-प्रदान करते ही आनंद, उपकार, सतीश व मैक्सोन को धर दबोचा। पूछताछ में उन्होंने जब यह खुलासा किया कि स्पेनिश मूल के गेरारडो के जरिये वीजा रैकेट चलता है तो पुलिस ने गुड़गांव निवासी गेरारडो को भी गिरफ्तार कर लिया।

तीन किश्तों में लेते थे रकम: विदेश जाने के इच्छुक लोगों से वीजा दिलाने के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वाला यह गिरोह तीन किश्तों में रकम लेता था। पहली किश्त सौदा होने पर ली जाती थी। चूंकि इस गिरोह के निशाने पर ज्यादातर पंजाब के ग्रामीण इलाके के लोग होते थे, इस कारण उनके नाम वीजा के लिए जरूरी दस्तावेज नहीं होते थे। यानी फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसे जब जमा कराया जाता था तो उस वक्त झांसे में आए लोगों को दूसरी किश्त अदा करनी पड़ती थी। कबूतरबाजी की तीसरी किश्त  वीजा संबंधी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ली जाती थीं।

 

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