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जैसी जरुरत थी, वैसी नहीं रही कोपेनहेगन वार्ताः ओबामा

जैसी जरुरत थी, वैसी नहीं रही कोपेनहेगन वार्ताः ओबामा

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि कोपनहेगन जलवायु परिवर्तन शिखरवार्ता पूरी तरह विफलता के मुहाने पर है। इससे पहले उन्होंने इस पर अंतिम दबाव बनाने का फैसला किया था।

ओबामा ने कहा कि कोपनहेगन में पूरी तरह विफलता देखने के बजाय, जिसमें कि कुछ भी हासिल नहीं हुआ और जो एक बड़ा कदम पीछे की ओर रहा, कम से कम हमने आधार तो बनाया और हम जहां थे वहां से बहुत पीछे नहीं खिसके।

जलवायु परिवर्तन पर कोपनहेगन शिखरवार्ता के बारे में पूछे जाने पर ओबामा ने कहा कि हमें जिस तरीके की जरूरत थी, यह ऐसे आगे नहीं बढ़ी। विज्ञान कहता है कि हमें अगले 40 साल में उत्सर्जन को महत्वपूर्ण तरीके से कम करना है। कोपनहेगन करार में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ, जो ऐसा होना सुनिश्चित करे।

उन्होंने अमेरिका के पीएसबी टीवी के न्यूजआवर कार्यक्रम में कहा कि उस समय क्या प्राप्त हुआ, जहां पूरी तरह विफलता के करीब थे और भारत के प्रधानमंत्री हवाई अड्डे की ओर जा रहे थे, चीनी प्रतिनिधि आवश्यक तौर पर बातचीत छोड़ रहे थे तथा सभी चीख रहे थे, तब क्या हुआ, शांति हो गयी।

ओबामा ने कहा कि हम कम से कम सभी देशों के लिए कानूनी तौर पर अबाध्य लक्ष्य पर सहमति में सक्षम थे, न केवल अमेरिका, न केवल यूरोप, बल्कि चीन और भारत के लिहाज से भी, जो दुनिया के सबसे बड़े उत्सर्जक बनने जा रहे हैं।

ओबामा ने अमेरिका, भारत, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के बीच उत्सर्जन कटौती पर हुए अबाध्यकारी कोपनहेगन करार का जिक्र करते हुए कहा कि इसलिए यह एक महत्वपूर्ण सिद्धांत था, जिसमें इस समस्या को सुलझाने के लिए सभी को कुछ न कुछ मिला।

करार कहता है कि सभी राष्ट्रों द्वारा ग्रीनहाउस गैसों और अन्य उत्सर्जन औसतन वैश्विक तापमान के लिहाज से पर्याप्त तौर पर कम होने चाहिए। हालांकि, यह लक्ष्य हासिल करने के लिहाज से विशेष उत्सर्जन दिशा-निर्देश तय नहीं करता।

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