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स्वार्थी सोच की उपज

मैं समझता हूं कि किसी भी नये राज्य का गठन एक स्वार्थी सोच की उपज है। यह तभी होता है, जब किसी नेता को यह एहसास होता है कि इस क्षेत्र में मेरा वर्चस्व भविय में लंबे समय तक रह सकता है या किसी नये नेता को उभरने के लिये कोई मुद्दा नहीं मिल रहा हो तो वे उस क्षेत्र के लोगों को उनका स्वार्थ दिखाकार अपना उल्लू सीधा करते हैं। क्षेत्रीय जनता को ध्यान दिलाया जाता है कि सारे खनिज हमारे हैं या हमारे क्षेत्र में कारखाने हैं तो इस पर सारा हक हमारा है या हमारी भूमि सोना उगल रही है और इसके पैसे का उपयोग दूसरे क्षेत्र में हो रहा है। अब लाख कोशिश के बावजूद बिहार झारखण्ड की बराबरी कर सकता है?
मनोज कुमार ‘चापर’, मोहीउद्दीन नगर, समस्तीपुर(बिहार)

ये पुराने चुटकुले हैं
सम्माननीय अखिलेश यादव जी आपके विचारों से अवगत हुआ। आपने जो कहा वे पुराने चुटकुले हैं, जो हर राजनेता तम्बाकू मलते हुए सुनाता था। विकास की बात बेमानी है, डर तो सबको यह है की यदि बंटवारा हो गया तो आप सब राजनीति कहां करोगे। पुरबिया सबको दे दे कर कंगाल होता जा रहा है, पुलिस की भर्ती हो तो ‘इटावा’, कमीशन में नियुक्ति हो तो ‘इटावा’, राज्य सभा में ‘इटावा’, जब ‘सैफई प्रदेश’ बन रहा था पूरब के गाँवों में पानी भी नहीं था।
डॉ. लाल रत्नाकर

यह कैसा सपना?
किसी राज्य की दुर्दशा इस बात पर निर्भर है कि उसे चलाने वालों का दिमाग कितना छोटा है, न कि राज्य कितना बड़ा है। चिंता की बात यह है कि अलग राज्य के गठन की मांग करने वालो की भीड़ में आम जनता नहीं दिख रही है। इस भीड़ में तो सिर्फ वे लोग दिख रहे है जो विधायक, मंत्री या मुख्यमंत्री बनने के सपने पाल रखे है। अगर आप छोटे राज्य का एकेडेमिक आधार पर समर्थन करते हैं तो एतराज नही, ज्यादातर उसे करियर आप्शन के तौर पर देख रहे हैं कि उससे उनका भविष्य उज्जवल हो सकता है।
आनंद यादव

राज्य बना पर कुछ न हुआ
उत्तराखंड जैसे राज्यों के पृथक होने के बाद के हालातों पर गौर करें तो शायद हम सभी इस बात पर एकमत हों कि छोटे राज्यों का विकास बड़े राज्यों की तुलना में बेहतर होता है। परन्तु यूपी को जिस तरह पश्चिमांचल, हरित प्रदेश, और बुंदेलखंड में बांटने का प्रस्ताव है, इन क्षेत्रों के विभाजन के पीछे यहाँ के निवासियों के तर्क भी भिन्न हैं। एक तरफ जहाँ हरित प्रदेश के पक्षधर इसे देश का अग्रणी कृषि योग्य राज्य बताते हैं, तो वहीं पश्चिमांचल के समर्थन में यहाँ का राज्य को अधिकतम राजस्व वसूली वाला अग्रणी औद्योगिक प्रदेश के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
गरिमश्री भारद्वाज, खुर्जा

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