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अतिक्रमण के चलते नहीं हो पा रहा है मलिन बस्तियों का सुधार

प्रदेश के शहरी क्षेत्रों की मलिन बस्तियों में अतिक्रमण के चलते वहाँ रह रहे लोगों को बेहतर आवास सुविधा देने का काम रुका हुआ है। इसे गंभीरता से लेते हुए शासन ने मलिन बस्तियों से तुरंत अतिक्रमण हटाने के निर्देश जिलाधिकारियों और विकास प्राधिकरण उपाध्यक्षों को दिए हैं। मलिन बस्तियों में रह रहे लोगों को बेहतर सुविधा वाले मकान बनाकर देने का काम जून 2010 तक पूरा करना है।

प्रदेश की मलिन बस्तियों में सुधारात्मक विकास का काम इसलिए नहीं हो पा रहा है क्योंकि मलिन बस्तियों में अत्यधिक अतिक्रमण हैं। इन अतिक्रमणों के चलते सूडा और डूडा के अफसर विकास कार्य कराने में असमर्थ हैं। पिछले दिनों अपर कैबिनेट सचिव की बैठक में इस प्रकार की मजबूरी सूडा के अफसरों ने बताई थी।

अपर कैबिनेट सचिव विजय शंकर पांडेय और सचिव सूडा नवनीत सहगल ने मलिन बस्तियों का राजधानी में दौरा किया था और अधिकारियों को निर्देश दिए कि समय से मकान बनाने का लक्ष्य पूरा कर लिया जाए।

इसके बाद श्री सहगल ने जिलाधिकारियों और विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्षों से कहा है कि मलिन बस्तियों में जहाँ विकास करने में अतिक्रमण बाधा बन रहा हो, वहाँ तुरंत अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाया जाए ताकि मलिन बस्तियों में रह  रहे लोगों को बेहतर जीवन यापन की सुविधा प्रदान की जा सके। तत्काल प्रभाव से करीब सात हजार आवास प्रदेश की इन शहरी मलिन बस्तियों में बनने हैं। इनमें से नई बस्ती और हाता मलिन बस्ती मे सबसे ज्यादा आवास बनाए जाएँगे।

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