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गांव की महिलाएं भी रखने लगी हैं बच्चों में अंतर

पहले दो बच्चों के बीच अंतर के महत्व को नहीं समझने वाली महिलाएं भी अब बच्चों में अंतर रखना चाहती हैं। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण उनके द्वारा लगातार कॉपर-टी लगवाना है। गांव की औरतों में आए इस जागरूकता के पीछे अस्पताल स्टाफ की ओर से डिलीवरी के बाद की जाने वाली काउंसलिंग है।

पहले ग्रामीण महिलाएं कॉपर-टी लगवाने से बहुत डरती थीं। उनमें इसको लेकर भ्रांती भी थी कि यह एक प्रकार की नसंबदी है। मगर अब उनका यह भ्रम दूर हो गया है और अब महीने में औसतन 15 से 20 ग्रामीण महिलाएं कॉपर-टी लगवाने के लिए आ रही हैं।

पीपीसी में डय़ूटी करने वाली डॉक्टर दीपा त्यागी का कहना है कि औरतों को कॉपर-टी लगवाने तथा बच्चों में अंतर रखने के लिए हम डिलीवारी के समय तो समझाते ही हैं, उसके बाद भी अगर कोई महिला जब गर्भपात के लिए आती हैं तो हम उसकी हिस्ट्री जानने के बाद कॉपर-टी लगवाने या नसबंदी करवाने की सलाह देते हैं।

अगर किसी महिला को पहले से एक बच्चा हो तो हम कॉपर-टी लगवाने और अगर पहले से तीन या उससे ज्यादा बच्चों हों तो हम उन्हें नसबंदी करवाने की सलाह देते हैं।

 

 

 

 

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