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मुस्लिम समाज की शादियों में फिजूलखर्ची पर्सनल लॉ बोर्ड की नजर

मुस्लिम समाज की शादियों में फिजूलखर्ची और दहेज पर अंकुश लगाने के लिए अब ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने गंभीरता से पहल की है। इस संबंध में मुस्लिम समाज के लिए निर्देश जारी किए हैं। अब शादियों की सहालग आने पर इस दफा उन मुस्लिम परिवारों को जहाँ लड़के या लड़की की शादी होनी है, समाजसुधारकों से दो चार होना पड़ सकता है।

बोर्ड द्वारा जारी निर्देशों में कहा गया है कि भविष्य में जिन परिवारों में शादियाँ होने वाली हैं, वहाँ बोर्ड के जिम्मेदारान और इलाके के प्रबुद्व व जागरूक लोग जाएं और परिवार के बड़ों को समझाएं कि वे शादी में फिजूलखर्ची न करें। और  न दहेज लें और न दें।

निकाह सिर्फ मस्जिदों में ही करवाया जाए और फिर लड़के वाले अपनी सामथ्र्य के हिसाब से वलीमे का आयोजन करें मगर उसमें भी ज्यादा फिजूलखर्ची न हो। गरज यह कि लड़की वालों पर खर्च का ज्यादा बोझ न पड़े और गरीब लड़कियों की शादी भी आसानी से हो सके।

दरअसल यह बोर्ड नेतृत्व के यह नए निर्देश बीती 20 दिसम्बर को यहाँ नदवा कॉलेज में हुई कार्यकारिणी बैठक में उस वक्त सामने आए जब समाज सुधार यानि इस्लाह-ए-मआशरा की मुहिम पर चर्चा के दौरान यह सुझाव सामने आया कि जिन शादियों में फिजूलखर्ची होती है और दहेज लिया-दिया जाता है वहाँ इमाम और काजी निकाह पढ़ाने न जाएं। मगर बैठक में यह प्रस्ताव बहुमत से खारिज कर दिया गया।

बोर्ड नेतृत्व ने यह भी कहा कि निकाह पढ़ाने से पहले उलमा वहाँ मौजूद लोगों के समक्ष अपनी बात स्पष्ट तौर पर रखें और समझाएं कि निकाह का सुन्नत तरीका क्या है और इस्लाम में यह क्यों कहा गया है कि सबसे अच्छा निकाह वही है जिसमें सबसे कम खर्च हो।

बैठक में बोर्ड के सचिव मौलाना वली रहमानी ने इस्लाह-ए-माअशरा की प्रगति रिपोर्ट पेश की थी। बोर्ड कार्यकारिणी के सक्रिय सदस्य डा.कासिम रसूल इलियास ने हिन्दुस्तान से बातचीत में साफ कहा कि इस्लाह-ए-माअशरा की मुहिम के तहत इस बार बोर्ड औरतों पर जुर्म न होने तथा नौजवान पीढ़ी को जागरूक किए जाने पर ज्यादा जोर दे रहा है।

इसी क्रम में शादी ब्याह में फिजूलखर्ची रोकने, दहेज रहित निकाह करवाने आदि के लिए मस्जिदों के इमामों को प्रशिक्षित किए जाने की भी योजना बन रही है।

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  • Web Title:शादियों में फिजूलखर्ची पर पर्सनल लॉ बोर्ड की नजर