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न्यायिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा का रिजल्ट प्रकाशित नहीं करने का आदेश

पटना हाईकोर्ट ने आगामी 30 दिसम्बर को बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा ली जाने वाली प्रारंभिक न्यायिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा (पीटी) का परीक्षाफल प्रकाशित नहीं करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा है कि आयोग पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार परीक्षा संचालित करें लेकिन रिजल्ट अदालत से अनुमति मिलने के बाद ही प्रकाशित करें।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्र तथा न्यायमूर्ति शिवकीर्ति सिंह की खंडपीठ ने दयानंद सिंह की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई के बाद बुधवार को यह आदेश दिया। इसके पूर्व महाधिवक्ता पीके शाही ने अदालत को बताया कि बिहार न्यायिक सेवा (उच्च) में किसी प्रकार का आरक्षण नहीं है।

निचले स्तर पर अत्यंत पिछड़ी जातियों के लिए भी आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं था। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट न्यायिक सेवा में अत्यंत पिछड़ी जातियों को आरक्षण देने के  पक्ष में नहीं है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य सरकार और हाईकोर्ट के बीच सहमति बन जाती है तो सरकार इस दिशा में कदम बढ़ा सकती है।

उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों में ओबीसी को आरक्षण प्राप्त है तो बिहार को इससे वंचित नहीं रखा जाना चाहिए और इसी के मद्देनजर हाईकोर्ट से विमर्श कर राज्य सरकार ने ओबीसी को न्यायिक सेवा में आरक्षण देने संबंधी नियमावली बनाई जिसकी वैधता को इस याचिका में आवेदक ने चुनौती दी है।

आवेदक के वकील चक्रपाणि का कहना था कि जब हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ओबीसी को न्यायिक सेवा में आरक्षण को स्वीकार नहीं किया तो फिर राज्य सरकार इसे कैसे लागू कर सकती है? इसपर अदालत ने कहा कि आगामी 19 जनवरी को इस मामले को अंतिम रुप से  निष्पादित कर दिया जाएगा। अदालत ने राज्य सरकार को भी  15 जनवरी तक अपना जवाबी हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया।

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  • Web Title:न्यायिक सेवा का रिजल्ट प्रकाशित नहीं करने का आदेश