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सेना की जमीन पर अवैध कब्जे से हाईकोर्ट चिंतित

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सेना की भूमि के अवैध कब्जे किए जाने पर गम्भीर चिन्ता व्यक्त की है। न्यायालय ने प्रमुख सचिव रक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि वह अनधिकृत रूप से कब्जाई गई सेना की भूमि को मुक्त कराने के लिए समस्त कमांड के कमाण्डरों को निर्देश जारी करे।

न्यायालय ने कहा कि सेना की भूमि को वापस उसके पास आना देशहित में जरूरी है। यह आदेश न्यायमूर्ति राकेश शर्मा ने कानपुर निवासी विष्णु नारायण गर्ग व अन्य की याचिकाओं पर पारित किया है।

न्यायालय का मत है कि इलाहाबाद, कानपुर, लखनऊ, बरेली, मेरठ, भोपाल मुम्बई, सुखना ङील आदि स्थानों पर सेना की भूमि पर भूमाफियाओं द्वारा अवैध कब्जा किया जाना चिन्ता का विषय है। न्यायालय ने कहा है कि सरकारी भूमि की सुरक्षा अनिवार्य है।

न्यायालय ने यह आदेश उस समय पारित किया जब इस मामले पर सुनवाई के समय केन्द्र सरकार की तरफ से न्यायालय को अवगत कराया गया कि उत्तर भारत में स्थित सेना छावनी क्षेत्र की भूमि पर भूमाफियाओं एवं प्रभावशाली लोगों द्वारा कब्जा किया गया है।

न्यायालय ने कहा है कि सेना की भूमि की सुरक्षा करना रक्षा विभाग के सम्पत्ति विभाग का दायित्व है ताकि उस भूमि का उपयोग सेना के लिए किया जा सके। इस संबंध में याची ने स्वयं को भूमिहीन बताते हुए 62 विस्वा भूमि की माँग की थी। इस सम्बन्ध में चकबन्दी अधिकारियों द्वारा पारित आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।

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  • Web Title:सेना की जमीन पर अवैध कब्जे से हाईकोर्ट चिंतित