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रात में फहराया जा सकता है तिरंगा

रात में फहराया जा सकता है तिरंगा

भारतीय नागरिक अब रात में भी राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहरा सकते हैं। इसके लिए शर्त होगी कि झंडे का पोल वास्तव में लंबा हो और झंडा खुद भी चमके। गृह मंत्रालय ने उद्योगपति सांसद नवीन जिंदल द्वारा इस संबंध में रखे गये प्रस्ताव के बाद यह फैसला किया। इससे पहले जिंदल ने हर नागरिक के मूलभूत अधिकार के तौर पर तिरंगा फहराने के लिहाज से अदालती लड़ाई जीती थी।

कांग्रेस नेता जिंदल को दिये गये संदेश में मंत्रालय ने कहा कि प्रस्ताव की पड़ताल की गयी है और कई स्थानों पर दिन और रात में राष्ट्रीय ध्वज को फहराने के लिए झंडे के बड़े पोल लगाने पर कोई आपत्ति नहीं है। जिंदल ने जून 2009 में मंत्रालय को दिये गये प्रस्ताव में बड़े आकार के राष्ट्रीय ध्वज को स्मारकों के पोलों पर रात में भी फहराये जाने की अनुमति मांगी थी।
   
जिंदल ने कहा था कि भारत की झंडा संहिता के आधार पर राष्ट्रीय ध्वज जहां तक संभव है सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच फहराया जाना चाहिए, लेकिन दुनियाभर में यह सामान्य है कि बड़े राष्ट्रीय ध्वज 100 फुट या इससे उंचे पोल पर स्मारकों पर दिन और रात फहराये गये होते हैं।

मलेशिया, जार्डन, अबू धाबी, उत्तर कोरिया, ब्राजील, मेक्सिको और तुर्कमेनिस्तान जैसे देशों का उदाहरण देते हुए जिंदल ने भारत के लिए भी इस तरह का प्रस्ताव रखा था। इन देशों में स्मारकों पर रात में झंडे लगे होते हैं।

जिंदल के पत्र के जवाब में मंत्रालय ने कहा कि इस तरह के पोल लगाये जा सकते हैं, रात में झंडों के चमकने के लिए उचित प्रकाश व्यवस्था होनी चाहिए, जिसमें बिजली जाने की स्थिति में बैकअप व्यवस्था हो। इसके अलावा किसी प्राकतिक कारण से झंडे को नुकसान पहुंचने के तुरंत बाद इसे बदला जाए।

जिंदल ने इससे पहले भारत के नागरिकों को सार्वजनिक तौर पर तिरंगा फहराने की इजाजत मिलने के लिए अभियान छेड़ा था और सुप्रीम कोर्ट ने 1996 में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया था, जिसमें देश के प्रत्येक नागरिक को सम्मान, मर्यादा के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराने को एक मूलभूत अधिकार बताया गया।

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