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ना भ्रष्टाचार बना मुद्दा, न स्पष्ट जनादेश को पड़े वोट

आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में बंद पूर्व मंत्री एनोस एक्का और हरिनारायण राय के चुनाव जीतने से झारखंड में भ्रष्टाचार विरोध के मुद्दे को धक्का लगा है। ऐसे आरोपी बंधु तिर्की और नलिन सोरेन भी अच्छे मत से चुनाव जीते हैं।

पूर्व सीएम मधु कोड़ा की परंपरागत सीट से उनकी पत्नी गीता कोड़ा विजयी हुई हैं। निगरानी जांच ङोल रहे नलिन सोरेन भी चुनाव जीत गए। वैसे जेल में बंद पूर्व मंत्री कमलेश सिंह तथा जेल के बाहर भानु प्रताप शाही के हारने से थोड़ा असर दिखा।

कोड़ा कांड को लेकर भाजपा और कांग्रेस चुनाव मैदान में भ्रष्टाचार पर बहुत कुछ कह रहे थे। एनोस एक्का और हरिनारायण राय का चुनाव प्रचार से दूर रहकर भी  जीतना उनके विधानसभा क्षेत्र में जनाधार को दर्शाता है। एक्का ने तो प्रधान महालेखाकार का पद छोड़ चुनाव में उतरे स्वच्छ छवि के कांग्रेस प्रत्याशी बेंजामिन लकड़ा को हराकर चुनाव जीता है। गीता कोड़ा ने मधु कोड़ा को मामलों में फंसाने की बात कह कर समर्थन जुटाया और सफल रहीं।

फिर खिचड़ी सरकार : स्पष्ट जनादेश और स्थायी सरकार के लिए भी बढ़-चढ़ कर नारे लगे थे, लेकिन त्रिशंकु विधानसभा और खिचड़ी सरकार की नौबत से यह मुद्दा नहीं चला। बड़े राजनेता जनता को कोसने लग गए हैं। राज्य गठन के बाद से स्थायी जनादेश नहीं मिलने को प्रदेश के पिछड़ेपन और गड़बड़ी को एक मुख्य कारण बताया जाता है। इसके बाद इस बार भी स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने से अभी से ही तरह-तरह की अटकलें लगाई जाने लगी हैं।

 राजद और भाजपा ने महंगाई को एक बड़ा मुद्दा बनाया था। महंगाई के लिए कांग्रेस को जमकर कोसा था। लालू प्रसाद ने तो सौ से अधिक सभाओं में बढ़ रही कीमतों के लिए कांग्रेस को ही जिम्मेदार ठहराया था। फिर भी कांग्रेस और झाविमो गठबंधन को खुब वोट मिलें हैं।

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