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आजसू का बजा डंका एक से दो अबकी हुए पांच

2005 में अकेला फिर 2005 में दो और अबकी सीधे पांच। झारखंड विधानसभा चुनाव के परिणाम चौंकाने वाले तो हैं, लेकिन इसी में आजसू का बजा डंका। आजसू के सुदेश महतो ने अपने दम पर चुनाव लड़कर पांच सीटें जीती हैं। परिणाम के तानाबाना में इसे जोरदार प्रदर्शन माना जा रहा है।

कुछ यही कारण है कि जोड़- तोड़ के केंद्र में आजसू भी शामिल है। सिल्ली से सुदेश महतो ने हैट्रिक लगाई, तो रामगढ़ से चंद्रप्रकाश चौधरी लगातार दूसरी बार जीतने में सफल रहे। 2000 में सुदेश पहली बार चुनाव जीते थे। फिर 2005 में चंद्रप्रकाश चौधरी ने संख्या को दो पर किया।

इस बार लोहरदगा से पार्टी के केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और पुराने आंदोलनकारी कमलकिशोर भगत ने कांग्रेस के सुखदेव भगत को पराजित किया है। 2005 में चुनाव हारने के बाद कमल ने लोहरदगा सीट पर ही अपने को केंद्रित कर लिया था। चंदनकियारी सीट पर भी आजसू के उमाकांत रजक ने 2005 के हार का बदला चुका लिया है।

रजक 2005 में दूसरे नंबर पर थे। चुनाव हारने के बाद रजक लगातार चंदनकियारी में जोर लगाते रहे। जुगसलाई में आजसू के रामचंद्र सहिस ने झामुमो के दिग्गज माने जाने वाले पूर्व मंत्री दुलाल भुइंया को शिकस्त दी है। सहिस पहले झामुमो से ही जुड़े थे। शानदार जीत के बाद भी तमाड़ में आजसू की हार से पार्टी सकते में है। रमेश सिंह मुंडा के पुत्र विकास मुंडा की जीत के लिए पार्टी ने ताकत झों की थी।

मतगणना में विकास कई चक्र तक आगे भी रहे, लेकिन आखिरकार जदयू के राजा पीटर ने सीट जीती। जीत की पांच सीटों के इतर बड़कागांव, गोमिया में भी आजसू के उम्मीदवारों ने ठीकठाक प्रदर्शन किया है।

बताते चलें कि किसी भी गठबंधन से दूर रहकर इस बार आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो ने राज्य भर में आजसू की जीत के लिए ताकत झोंकी थी। सिल्ली सीट को उन्होंने कार्यकर्ताओं के ऊपर छोड़ दी थी। इसके बाद वह दूसरी सीटों की कमान संभाल रहे थे।

आजसू ने जिन सीटों पर झंडा गाड़ा
सिल्ली
रामगढ़
जुगसलाई
लोहरदगा
चंदनकियारी

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