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पुलिस गंभीर होती तो बच सकती थी जान

लोहा व्यापारी देवीशंकर के शव के गांवड़ी रजवाहे पर मिलने के बाद पुलिस ने अपनी फजीहत से बचने के लिए बुधवार सुबह कविनगर थाने में उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की। जबकि उनके परिजनों ने रात को पुलिस को उनके गायब होने की सूचना दे दी थी।

रात को पुलिस ने परिजनों की शिकायत पर ध्यान देने की बजाए उन्हें थाने-थाने भटकाया। यदि पुलिस ने रात को ही मामले को गंभीरता से लिया होता तो शायद उनकी जान सकती थी। इस बारे में पूछने पर पुलिस अधिकारी रात करीब दो बजे वायरलैस सेट उनकी गाड़ी नंबर फ्लैश करने की बात कहकर अपना बचाव करते दिखाई दिए। 

नेहरू नगर थर्ड डी-10 में रहने वाले देवीशंकर की गोविंदपुरम स्थित लोहा मंडी में प्रयाद आयरन एंड ट्रेडर्स के नाम दुकान है। शाम करीब 7 बजकर 55 मिनट पर उन्होंने मोबाइल से अपनी पत्नी रमा को फोन करके एक घंटे में लौट आने की बात कही थी। उनकी दुकान पर काम करने वाले सतेंद्र ने बताया कि वह ड्राइवर सुनील के साथ करीब 7:15 मिनट पर घर जाने की बात कहकर दुकान से स्कोडा कार में निकले थे। करीब एक घंटे पहले उनका बेटा विजय वहां से निकला था।

नौ बजे तक घर न लौटने पर जब परिजनों ने दोबारा फोन किया तो फोन स्विच ऑफ था। परिजनों ने अपने परिचितों व रिश्तेदारों को फोन करके जानकारी की लेकिन उनका पता नहीं लग सका। परिजन तहरीर लेकर कविनगर थाने पहुंचे तो पुलिस ने उनका घर नेहरू नगर में होने की बात कहकर सिहानी गेट थाने के लिए टरका दिया। सिहानी गेट थाने से पुलिस ने उनके लोहा मंडी से गायब होने की बात कहकर परिजनों को वापस कविनगर थाने भेज दिया।

कई घंटे इधर से उधर चक्कर काटने के बाद भीपुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। सुबह जब उनका शव गांवड़ी रजवाहे के पास मिला तो पुलिस नेअपनी फजीहत से बचने के लिए बुधवार सुबह 8:55 मिनट पर कविनगर थाने में उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की।

डीआईजी/एसएसपी अखिल कुमार का कहना है कि रात को वायरलैस पर मैसेज फ्लैश करा दिया गयाथा। सुबह जब उनके परिजन थाने पहुंचे तो उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। बाद में पुलिस को उनकी हत्या होने की जानकारी मिली।
  

 

 

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  • Web Title:पुलिस गंभीर होती तो बच सकती थी जान