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खोई नहीं, कूड़े में डाली करकरे की बुलेट प्रूफ जैकेट

खोई नहीं, कूड़े में डाली करकरे की बुलेट प्रूफ जैकेट

महाराष्ट्र के दिवंगत एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे की बुलेट प्रूफ जैकेट के गायब होने से जुड़े मामले में बुधवार को तब एक नया मोड़ आया जब एक सरकारी अस्पताल के सफाईकर्मी ने दावा किया कि उसने काफी पहले उसे कूड़े में डाल दिया था।

सफाईकर्मी दिनेश लालजी का मजिस्ट्रेट के समक्ष यह बयान 26 नवंबर को मुंबई पर हुए हमले के दौरान आतंकवादियों द्वारा करकरे और दो अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की हत्या किए जाने के एक साल के बाद आया है।

सफाईकर्मी ने अपने बयान में कहा कि करकरे का शव पोस्टमार्टम के लिए जे जे अस्पताल लाए जाने के बाद 27 नवंबर की रात मैंने गलती से जैकेट को एक पालीथीन बैग में बायो मेडिकल और गैर मेडिकल कचरे के साथ रख दिया जिसे फेंकने के लिए देवनार डंप ग्राउन्ड भेज दिया गया।

इस बयान पर करकरे की पत्नी कविता करकरे ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह कहानी तब आई है जब सरकार काफी दबाव में है। मैंने इस मामले में निष्पक्ष न्याय पाने की सारी उम्मीद छोड़ दी है। मैं इस पर विश्वास नहीं कर सकती। सरकार दबाव में है और इसलिए यह बयान इस मोड़ पर आया है।

सफाईकर्मी का बयान एक सामाजिक कार्यकर्ता की ओर से इस संदर्भ में दाखिल मामले के सिलसिले में आया है। इसमें उन्होंने जैकेट के गायब होने के मामले की जांच कराने की मांग की थी।

35 वर्षीय सफाईकर्मी ने मंगलवार को दिए गए अपने बयाने में कहा कि उसे 27 नवंबर, 2008 को अस्पताल के आपरेशन थिएटर की सफाई करने के दौरान एक जैकेट मिला था। उसका मानना है कि यह करकरे का जैकेट रहा होगा।

सफाईकर्मी ने कहा कि उसने जैकेट को एक थैले में रख दिया था जिसमें गैर मेडिकल कचरे थे। इससे पहले, सरकार ने गायब जैकेट की जांच का आदेश दिया था। पुलिस जैकेट की तलाश में देवनार मैदान गई थी लेकिन वह उसे नहीं पा सकी।

एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि गुत्थी सुलझ गई है लेकिन जैकेट नहीं मिला है। इस बात की कम ही संभावना है कि जैकेट मिलेगा क्योंकि इसे निश्चित तौर पर फेंक दिया गया होगा।

मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत दर्ज कराने वाले सामाजिक कार्यकर्ता संतोष डौंडकर के वकील वाईपी सिंह ने कहा कि यह अपेक्षित था। जांच की दिशा अब यह होनी चाहिए कि जैकेट के गायब होने और इस तरह का त्रुटिपूर्ण जैकेट खरीदने का पुलिस को अधिकार देने वाली फाइल के गायब होने से किसे फायदा होगा।

सिंह ने कहा कि घटना के एक साल बाद एक सफाईकर्मी का यह कहना कि करकरे की जैकेट होने की बात जानने के बावजूद उसने इसे कूड़े में डाल दिया तो यह निश्चित तौर पर आश्चर्यजनक है। डौंडकर ने मजिस्ट्रेट के समक्ष एक शिकायत दर्ज कराकर उनसे जैकेट के गायब होने के मामले की जांच कराने की मांग की थी।

उनकी शिकायत पर सुनवाई करते हुए मजिस्ट्रेट ने जेजे मार्ग पुलिस को एक प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था। इसका तत्काल अनुपालन किया गया था। चूंकि, सफाईकर्मी मामले में मुख्य गवाह है इसलिए उसका बयान मजिस्ट्रेट ने दर्ज किया।

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