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दो टूक (23 दिसंबर, 2009)

समाज में सबसे ज्यादा उत्पीड़न व उपेक्षा झेलने वालों में तलाकशुदा और पति द्वारा छोड़ दी गई महिलाओं को भी गिना जा सकता है। पुरुष प्रधान समाज अमूमन इन्हें अच्छी निगाह से नहीं देखता और अगर वह गरीब भी हों तो हालत कोढ़ में खाज जैसी हो जाती है।

दिल्ली सरकार ने तलाकशुदा, बेसहारा और परित्यक्ताओं के लिए पेंशन की व्यवस्था कर अपनी संवेदनशीलता का परिचय दिया है। पेंशन के रूप में एक हजार रुपए की रकम हालांकि बहुत ज्यादा नहीं, लेकिन जैसा कि कहा जाता है, डूबते को तिनके का सहारा भी काफी होता है। ऐसे वक्त में जब सरकार की ओर से मिलने वाली तमाम सुविधाएं निजी हाथों में जा रही हैं, कमजोरों के फायदे में उठाया गया एक कदम भी सुकून देता है।

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