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आहिस्ता.. आहिस्ता

कलफ कालर से चुस्त, नाक पलक दुरुस्त, मौलाना सजे धजे, छड़ी झुलाते आए और बोले- ‘कोर्ट जा रहा हूं। आज दादा जान के मुकदमे का फैसला है। सन साठ में दादा ने तैश में आकर किसी की पीठ पर चार-छ: छड़िया जमा दी थीं। केस चला, पेशियां पड़ती गईं, मजिस्ट्रेट बदलते गए। अब पचास साल बाद आज फैसला है।’ मैंने पूछा- ‘आप फैसले का क्या करोंगे?’ बोले- ‘वल्लाह! फैसले की कॉपी दादा जान की कब्र पर रखकर चिराग जलाऊंगा, फातेहा पढूंगा और उन्हें खुशखबरी सुनाऊंगा कि लो, आप बाइज्जत बरी हो गए।’ मेरी हंसी छूट गई।

मौलाना लादेन ने डिब्बे से एक पान निकालकर मुंह में झोंका और बोले- ‘हंसो मत! यह अदालत की तौहीन है। अपने मुल्क में हर काम करीने से, सलीके से होता है। यह थोड़ा ही कि आज जुर्म और कल धांय से फैसला। पानी बूंद-बूंद टपकता है। दस-बीस साल सोच समझ कर जजमेंट होता है। अब आज की फर्स्ट पेज न्यूज ही ले लो। अपने शहर में कोई चन्द्र प्रकाश हैंगे। 1978 में, जहां काम करे थे वहां से एक-एक दो-दो रुपए करके पांच रुपए 24 पैसे का गबन किया। आई रिपीट, रुपीज फाइव, पैसे ट्वंटी फोर ओनली। धरे गए, केस चला। 32 साल मुकदमे में दौड़ते रहे, 50 हजार से ज्यादा खर्च हुआ। अब जबकि चन्द्र प्रकाश 62 साल के हैं, फैसला हुआ।

चूंकि परिवार का पोषण करने वाले अकेले हैं, सो अदालत ने रहम करके 3 साल कैद ब मशक्कत (सश्रम कारावास) और तीन हजार जुर्माने की सजा दी। रहे नाम अल्ला का, अपने यहां देर है, अंधेर नहीं। चन्द्र प्रकाश के पांच रुपए तो मधु कोड़ा के अरबों, जुर्म तो जुर्म ही है, भाई मियां!’ मुंह का पान एक ओर सरका कर मौलाना ने खाली जगह में एक पान और भरा और बोले- ‘सुबह-सुबह लल्लन मुझसे भिड़ गए कि अदालती फैसले बरसों में क्यों होते हैं? भई कमाल है। कोई गन्ना है कि मशीन में डाला, चर्खी घुमाई, रस निकाल लिया। 

लिब्राहन रिपोर्ट ही 17 साल बाद पहले लीक हुई फिर बरामद हुई। ज्यादा हड़बड़ी में साल-दो साल में ही फैसला हो जाए तो लोगों का यकीन उठ जाए। खूब कूट छान और उबाल पका कर फैसला सुनाया जाता है। अकबर इलाहाबादी यों ही नहीं कह गए हैं- ‘खुदा महफूज रखे आप को तीनों बलाओं से..तबीबों (डॉक्टरों) से, वकीलों से, हसीनों की निगाहों से।’ मौलाना ने पीक एक ओर डिपाजिट की और जगजीत सिंह की गजल का मिसरा गुनगुनाते- ‘सरकती जाए है रुख से नकाब..आहिस्ता-आहिस्ता।’ उन्हें खुशी थी कि दादा जान पर दिया गया फैसला उनकी टूटी कब्र पर तो रख सकेंगे।  

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