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डीए-बोनस के लिए विभागों से बजट का हाल पूछा

प्रदेश सरकार ने राज्य कर्मचारियों को अब पाँच प्रतिशत डीए और एक महीने का बोनस देने की कवायद शुरू कर दी है। इस संबंध में विभागों से यह पूछा गया है कि उनके बजट में कितनी धनराशि बची है। प्रमुख सचिव वित्त मनजीत सिंह भी बातचीत में इस बात की पुष्टि करते हैं कि सरकार डीए और बोनस दोनों ही देने के लिए प्रतिबद्ध है और इसकी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

उच्च स्तरीय सूत्रों ने बताया कि डीए और बोनस केवल इसलिए रोका गया क्योंकि उस समय सरकार के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकता 40 प्रतिशत एरियर देने की थी। पहली अक्टूबर से एरियर भुगतान का आदेश यह सोचकर किया गया था कि दीपावली पर राज्य कर्मचारियों को कुछ न कुछ अतिरिक्त धनराशि मिल जाए।

एरियर के मद में छह हजार करोड़ रुपए में से चार हजार करोड़ सरकार के खजाने से निकाला जा चुका है। अभी कुछ विभागों का एरियर बकाया है। पेंशनर्स के एरियर का भुगतान भी सरकार ने खोल दिया है। उनके भुगतान की प्रक्रिया चल रही है।

इतनी बड़ी राशि के एरियर के मद में जाने के कारण ही सरकार ने डीए और बोनस रोक लिया था। डीए भी केंद्र सरकार ने जनवरी में छह प्रतिशत और जुलाई में पाँच प्रतिशत घोषित कर दिया। जबकि राज्य सरकार दो प्रतिशत डीए की किस्त का अनुमान लगाकर चल रही थी।

जनवरी का उसने भुगतान कर दिया था। लेकिन जुलाई से देय डीए का उस पर 600 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इसी तरह बोनस पर करीब 1800 करोड़ का खर्च आएगा। सरकार इतना खर्च मैनेज करके जल्द ही डीए और बोनस का भुगतान करेगी।

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