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शक्ति का विकेंद्रीकरण हो

विभाजन के पीछे नेतृत्व के विकेंद्रीकरण की इच्छा होती है, चाहे परिवार, समाज, राज्य या राष्ट्र का विभाजन हो। नेतृत्व का विकेंद्रीकरण करने के लिए विभाजन आवश्यक नहीं है वरन शक्ति का विकेन्द्रीकारण मात्र पर्याप्त है। जब भी किसी विभाजन की बात होती है तो इसके पीछे विषमता की आड़ ली जाती है। पर कारण नेतृत्व को हथियाने की इच्छा ही होती है। उत्तराखंड, झारखण्ड, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के विभाजन के बाद भी स्थिति में कोई उल्लेखनीय परिवर्तन नहीं आया है। राम चक्रवर्ती सम्राट थे। बाद में कितने छोटे-छोटे राजे-रजवाड़े हुए वे आपस में ही लड़ते रहे। विकास तो नहीं विनाश ही होता रहा।
उमेश्वर दत्त ‘निशीथ’, सी- गेट नंबर- के पास, पनकी, कानपुर

तोड़ो नहीं जोड़ो
राज्य को तोड़ कर अलग किया जाता है वहीं राज्यों को जोड़ा क्यों नहीं जाता है? अगर दो राज्य जुड़ते है तो विकास उतनी ही तेजी से होगा और उस राज्य की शक्ति भी बढ़ेगी। इसका उदाहरण बिहार और झारखण्ड है जब ये अलग नहीं था तब बिहार के पास कितना कुछ था और आज अलग होने पर उन्हें क्या मिला? दोनों जुड़े रहते तो शायद इनकी तस्वीर ही कुछ और होती।  
सुप्रिया रंजन

यह सही फार्मूला नहीं
इस बात से भी कोई इनकार नहीं कर सकता कि अलग राज्यों के गठन के पीछे बहुत हद तक राजनैतिक महत्वकांक्षाएं होती हैं। अगर अलग राज्य बन जाते हैं तो कई छोटे नेताओं को अपनी राजनीति चमकाने के अवसर मिल जाते हैं। अधिक लोगों को विधानसभा तक पहुंचने के अवसर मौजूद होते हैं। छोटे राज्यों के निर्माण में कइ तरह की समस्यायें सामने आती हैं। हां, यह जरूर होता है कि अधिक लोग मंत्री बन जाते हैं। छोटे राज्यों में सरकारी घपले ज्यादा होते हैं। छोटे राज्य बनाना विकास का कोई सही फार्मूला नहीं हैं। उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और झारखण्ड के अनुभवों में तो कम से कम यही बात सामने आई है।
सन्दीप भट्ट, स्कूल आफ कम्युनिकेशन, दून विश्वविद्यालय देहरादून

पुनर्गठन क्षेत्रफल के आधार पर
नवगठित छोटा राज्य प्रशासनिक दृष्टि से अधिक सुगठित होगा या अधिक सुनियोजित तरीके से वहां विकास होगा इसकी क्या गारंटी है? सबसे आसान तरीका यह होगा कि सर्वप्रथम यह तय किया जाय कि देश में राज्यों की कुल संख्या क्या हो? यदि यह संख्या तय हो जाय तो देश के कुल क्षेत्रफल में इस संख्या से भागकर एक राज्य का क्षेत्रफल आसानी से निर्धारित किया जा सकता है। 
पी. के.राय, राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, पूसा

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