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..व्यक्तित्व विस्तार

यदि अपने आप को काम के बोझ का मारा बेचारा मानने लगते हैं। हमको लगता है कि जिसे पेशे या जॉब में हम हैं वह हमारे मुफीद नहीं है। दफ्तर में दिए गए किसी भी काम में दिल नहीं लगता तो हमें खुद से कुछ सवाल पूछने चाहिए, जैसे साथ काम करने वाले लोग क्यूं हमसे बेहतर परफॉर्म कर रहे हैं? दफ्तर में हमें क्या हमेशा अपने काम या बॉस के बारे में हमेशा नकारात्मक बातें दिखाई देती हैं? अगर इन सवालों का जवाब हां में है तो हो सकता है कि आपके तरक्की की राह में ब्रेक आ जाए या फिर नौकरी छोड़नी पड़े।

जॉब वही जो मन भाए
कोई भी जॉब ज्वाइन करने से पहले तय करे कि वह आपकी प्रवृत्ति और प्रकृति के अनुकूल है या नहीं। दरअसल, हममें अधिकतर लोग जॉब ज्वाइन करने से पहले सिर्फ यह मानते हैं कि काम कोई भी मिले फौरन कर लेना चाहिए। वह नहीं सोचते कि इसमें उन्हें आगे क्या दिक्कतें आ सकती हैं। ध्यान रखें कि जॉब की चुनौतियों और जॉब की प्रकृति दो अलग सवाल हैं। हम जॉब की चुनौतियों से तभी निपट सकते हैं जब हम उसकी प्रकृति के अनुकूल हों। यदि हम जॉब की प्रकृति के अनुकूल नहीं तो जीवन में हर जगह तालमेल बिगड़ेगा। फिर चाहे वह दफ्तर हो या घर। इस सब का नतीजा होगा व्यक्तित्व पर नकारात्मक प्रभाव और अवसाद।

जॉब में पाएं खुशी
जॉब में मन तभी लगता है जब वह हमारी प्रकृति के अनुकूल हो या हम उसके काबिल हों। हमारा पेशा या जॉब हमारे व्यक्तित्व को विस्तार देता है। अगर हमारे व्यक्तित्व का यह विस्तार लगातार न हो तो हम न तो खुद संतुष्ट हो पाते हैं, और न ही वरिष्ठों को अपने काम से संतुष्टि दे पाते हैं। सो जरूरी है कि हमारा काम या पेशा ऐसा हो जो हमारे व्यक्तित्व को विस्तार देने में सहायक हो।

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