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क्रिकेट के बहाने रेकी

सेंधमारी के बाद आग लगाने वाला नाबालिग सदस्यों का गिरोह सरकारी कॉलोनी केपार्क में क्रिकेट खेलने के बहाने बंद फ्लैटों की रेकी करता था। गिरोह के सदस्य वारदात के बाद फरार होने के लिए बेक लेन और अन्य रास्तों को बखूबी जानते थे। दिन के समय जो फ्लैट बंद मिलते थे उनके बारे में गिरोह को पूरी जानकारी रहती थी। तभी सदस्य वारदात के बाद आसानी से फरार होने का रास्ता भी तय कर लेते थे। वारदात के बाद ये लोग रेलवे स्टेशन और बदरपुर इलाके में चोरी का माल ठिकाने लगाने चले जाते थे। पार्क में गिरोह के सदस्य नशा करने के अलावा जुआ आदि भी खेलते थे।

नाबालिग का प्रोफाइल
नाबालिग की स्कूल में दर्ज जन्म तिथि के अनुसार वह अभी 17 साल का है। बचपन में जब वह एक साल का था तो उसकी मां ने पिता के शराबी होने की वजह से आग लगाकर खुदकुशी कर ली थी। उसकी बहन मौसी के पास रहती है। उसके पिता का भी कोई तय ठिकाना नहीं है। अभी वह सरोजनी नगर मार्केट में सामान बेचकर गुजारा करता है। नाबालिग ने सात-आठ साल की उम्र से ही सेंधमारी करना शुरू कर दिया था। उसके खिलाफ आठ से नौ मामले हैं।

पुलिस ने लिखा बाल सुधार गृह को पत्र
बाल सुधार से फरार होने वाले नाबालिग को पकड़ने के बाद दक्षिण जिला पुलिस ने सुधार गृह को एक पत्र लिखकर उसकी कड़ी निगरानी रखे जाने की गुजारिश की है। पुलिस को उसके बालिग होने से पूर्व अभी भी यह डर सता रहा है कि कि कहीं वह फिर से बाल सुधार गृह से बाहर न आ जाए। गौरतलब है कि गत 15 मई को नाबालिग अन्य साथियों के साथ फरार हो गया था। तभी से वह अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर आए दिन वारदातों को अंजाम दे रहा था।

अभी और भी हैं नाबालिग सदस्य..
पुलिस की मानें तो अभी भी आठ से 16 वर्ष तक की उम्र के कई नाबालिग इस गिरोह में सक्रिय हैं। ऐसे में पुलिस एक नाबालिग के पकड़े जाने के बाद भी सेंधमारी और फ्लैटों में आग लगाने की वारदातों क ो पूरी तरह से रोकने की बात पर खुद आश्वस्त नहीं है। माना जा रहा है कि अभी गिरोह के अन्य सदस्य फिलहाल भूमिगत हो गए हैं। गिरोह में नाबालिग सदस्यों का इस्तेमाल फ्लैटों के बाथरूम और रसोई की खिड़की से प्रवेश करने के लिए किया जाता था। इस गिरोह ने लक्ष्मीबाई नगर में रहने वाले एक रीजनल कमिश्नर समेत दो अधिकारियों के घर में भी सेंध लगाई थी। यह गिरोह 150 से अधिक वारदातों में शामिल रह चुका है।

आग लगाने का मकसद
यह गिरोह सेंधमारी के बाद फ्लैट में महज इस लिए आग लगाता था कि उनका गिरोह ऐसा करने पर चर्चा में रहेगा। पिछले कुछ ही समय में दक्षिण दिल्ली की सरकारी कॉलोनियों के निवासी सेंधमारी के बाद आग लगाने वाले गिरोह के आतंक से घबराने लगे थे। इसके अलावा आग लगने के बाद घटनास्थल पर उनके फिंगर प्रिंट के सबूत भी मिट जाते थे।

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