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पूविवि की परीक्षाएं छह मार्च से

वीर बहादुर सिंह पूर्वाचल विश्वविद्यालय की परीक्षा समिति ने 2010 की परीक्षाएं 6 मार्च से कराने का निर्णय किया है। समिति ने तय किया है कि, दागी महाविद्यालयों को कतई परीक्षा केंद्र न बनाया जाय।

स्नातक व स्नातकोत्तर में द्वितीय व तृतीय वर्ष की कक्षाओं के लिए प्रवेश लेने की तिथि बढ़ाकर 6 जनवरी कर दी गयी है। हांलाकि इसके लिए दो सौ रुपये अतिरिक्त शुल्क देना पड़ेगा। समिति ने इंजीनियरिंग के छात्रों की मांगों पर भी गंभीरतापूर्वक विचार विमर्श किया है।

विश्वविद्यालय के बंटवारे के बाद वर्ष 2010 की परीक्षा तय करने के लिए मंगलवार को कुलपति प्रो. आर.सी. सारस्वत की अध्यक्षता में सभागार कक्ष में दिन में 12 बजे परीक्षा समिति की बैठक हुई। बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा की गयी।

सर्वसम्मति से तय किया गया कि, सभी महाविद्यालयों की परीक्षाएं छह मार्च से करायी जायेंगी। जिन महाविद्यालयों के मानक पूरे नहीं हुए हैं, उनके फार्म मंजूर नहीं किये जायेंगे। हालांकि इस तरह के प्रकरण को श्रेणीबद्ध करते हुए जिम्मेदारी कुलसचिव को सौंपी गयी है।

समिति के सदस्यों के अनुसार, पहली श्रेणी में 2009 में प्राप्त ऐसी मान्यता वाले महाविद्यालयों को शामिल किया गया है, जिन्हें कक्षा संचालित करने की अनुमति नहीं थी, लेकिन कक्षाएं संचालित कर रहे हैं। ऐसे आठ कालेज हैं।

दूसरी कटेगरी में जिनकी सम्बद्धता निस्तारित नहीं हो पायी थी और कक्षाओं का संचालन हो रहा है, ऐसे दो दजर्न कालेजों के लिए तय हुआ कि, उनके प्राचार्य समय सीमा के भीतर सम्बद्धता निस्तारित करायें, अन्यथा उन पर विचार नहीं होगा। साथ ही 2009 में सम्बद्ध हुए कालेजों का स्थलीय निरीक्षण हो।

बैठक में सुधाकर महिला महाविद्यालय, वाराणसी की वर्ष 2005-06 की बीएड परीक्षा का परिणाम कोर्ट के फैसले के बाद ही घोषित करने का निर्णय किया गया। ज्ञात हो कि उक्त कालेज में 180 छात्रों का प्रवेश ले लिया गया था। 90 के परिणाम घोषित कर दिये गये थे, लेकिन 90 अन्य छात्रों में कुछ के संदिग्ध होने पर मामला लटक गया था।

बैठक में तय हुआ कि, संदिग्ध पाये गये दो दजर्न छात्रों के फार्म उसी सत्र के लिए विश्वविद्यालय से जारी हुए थे।
समिति की बैठक में इंजीनियरिंग छात्रों के प्रकरण पर गम्भीरता से विचार हुआ। सदस्यों ने तय किया कि, इंजीनियरिंग की परीक्षा में एग्रीगेड के आधार पर रिजल्ट दिया जाय। वर्ष 05 से पूर्व यही व्यवस्था थी। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए छात्रों ने भी धरना-प्रदर्शन किया था।

बैठक में प्राचार्य डॉ. यू.पी. सिंह, डॉ. लालजी त्रिपाठी, प्रो. पीसी विश्वकर्मा, डॉ. देवेन्द्र प्रताप सिंह, डॉ. अनिल प्रताप सिंह, डॉ. अपरबल राम यादव, डॉ. टी.बी. सिंह, डा. के.एन. सिंह, डा. एन.एस. सिंह, परीक्षा नियंत्रण आर.एस. यादव, आदि शामिल थे। संचालन कुलसचिव डा. बी.एल. आर्य ने किया।

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