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हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण के बारे में व्यवस्था दी


इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम का प्रावधान उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद द्वारा अधिग्रहीत की जा रही भूमि पर भी लागू होगा।

इसके साथ ही न्यायालय ने उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद द्वारा दाखिल कई याचिकाओं को खारिज कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति पीसी वर्मा एवं न्यायमूर्ति राजेश चन्द्रा की खण्डपीठ ने पारित किया है।

याचिका के अनुसार आवास एवं विकास परिषद ने हाऊसिंग स्कीम एवं पनकी थर्मल पावर स्टेशन के लिए भूमि अधिग्रहीत किया था। उसके बाद किसानों के लिए भूमि का मुआवजा निर्धारित किया था। कुछ किसानों ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 28-ए के अन्तर्गत मुआवजे के पुनर्निर्धारण की अर्जी एडीएम (भूमि अधिग्रहण) कानपुर को दी थी।

इस अर्जी को एडीएम ने स्वीकार कर लिया था जिसे आवास एवं विकास परिषद ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। परिषद का तर्क था कि मुआवजा बढ़ाने के लिए भूमि अधिग्रहण अधिनियम के अन्तर्गत पुनर्निर्धारण एडीएम द्वारा किया जाना गलत है। उसका यह भी कहना था कि यदि भूमि के अधिग्रहण की कार्यवाही उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के प्रावधानों के अन्तर्गत की जाती है तब मुआवजा के लिए भूमि अधिग्रहण का कानून लागू नहीं होता है।

न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि आवास एवं विकास परिषद द्वारा भूमि अध्याप्त मामले में भी भूमि अधिग्रहण अधिनियम का प्रावधान लागू होगा। न्यायालय ने एडीएम द्वारा पारित आदेश को वैध ठहराया है।

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