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वंशवाद का तमगा लिए सुखबीर छाए रहे राजनीति में

वर्ष 2009 में पंजाब के राजनीतिक परिदृश्य पर मुख्यमंत्री पिता के उत्तराधिकारी के तौर पर सुखबीर सिंह बादल छाए रहे, वहीं कई मुददों को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन में दरार साफ नजर आई और लोकसभा चुनावों में शिरोमणि अकाली दल, भाजपा, गठबंधन का प्रदर्शन फीका रहा।

वर्ष 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार हुआ और सिख चरमपंथियों को खदेड़ने के लिए सेना ने स्वर्ण मंदिर में प्रवेश किया था। इसके 25 साल बाद पुरानी यादों को ताजा करने की कोशिश हुई। गुरूद्वारों का प्रबंधन करने वाली शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने अपना सालाना कैलेंडर जो तैयार किया उसमें सेना के हमले में बुरी तरह क्षतिग्रस्त स्वर्ण मंदिर और अकाल तख्त की तस्वीर थी।

मई में आस्ट्रिया के वियना में एक गुरूद्वारे में जाति संबंधी टकराव के दौरान हुई गोलीबारी में दलितों के समुदाय डेरा सचखंड वालां के एक प्रमुख नेता संत रामानंद की मौत हो गई और उनके अनुयायी सड़कों पर उतर आए। इस घटना के बाद पंजाब और हरियाणा में कुछ स्थानों पर हिंसा हुई। जालंधर में पुलिस की गोलीबारी में तीन प्रदर्शनकारी मारे गए और करीब 20 घायल हो गए। हरियाणा में गुरूद्वारों के प्रबंधन के लिए अलग निकाय बनाने के प्रस्ताव को लेकर एसजीपीसी सहित विभिन्न सिख संगठनों का हरियाणा सिख गुरूद्वारा प्रबंधक समिति (एचएसजीपीसी) तदर्थ: के सदस्यों के साथ टकराव हुआ।

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह तथा अन्य के खिलाफ सतर्कता ब्यूरो ने अमृतसर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट भूमि घोटाला के सिलसिले में आरोप पत्र दाखिल किया। राज्य को इस साल बिजली और वित्त संकट से भी गुजरना पड़ा। चालू वित्त वर्ष के अंत तक राज्य का कर्ज बढ़कर करीब 60,000 करोड़ रूपये हो गया। प्रकाश सिंह बादल के उत्तराधिकारी के तौर पर सुखबीर वर्ष भर राज्य की राजनीति में छाए रहे। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर जनवरी में उप मुख्यमंत्री बनाए गए लेकिन इसके छह माह के अंदर वे विधानसभा के लिए निर्वाचित होने में नाकाम रहे और उन्हें उप मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा। बाद में जलालाबाद उपचुनाव जीत कर उन्होंने अपनी स्थिति मजबूत की।

सुखबीर को उप मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद गठबंधन के साक्षीदारों में टकराव शुरू हो गया जिससे कई बार सरकार के लिए शर्मिंदगी की स्थिति आई। भाजपा की मांग के आगे झुकते हुए सरकार ने बिजली की दर में 12 फीसदी की वृद्धि वापस ले ली। लोकसभा चुनावों में भी सत्तारूढ़ गठबंधन का प्रदर्शन फीका रहा और 13 में से आठ सीटें उसे कांग्रेस के हाथों गंवानी पड़ी। भाजपा केवल अमृतसर सीट जीत पाई। मई में हुए इन चुनावों में बठिंडा सीट पर परिवार का परिवार से टकराव हुआ। यहां सुखबीर की पत्नी हरसिमरत कौर बादल ने अमरिंदर सिंह के पुत्र रनिन्दर को एक लाख से अधिक मतों से हराया।

राज्य सीमा पार से हुए हमलों का निशाना भी बना। सितंबर में पड़ोस से भारतीय भूभाग में पांच रॉकेट दागे गए जो अमृतसर के सीमाई गांवों में गिर कर फटे। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के कथित समर्थन से उग्रवाद पुनर्जीवित होने के संकेत भी राज्य में मिले। साल भर में यहां 46 संदिग्ध उग्रवादी गिरफ्तार किए गए और खालिस्तान जिन्दाबाद फोर्स तथा बब्बर खालसा इंटरनेशनल सहित विभिन्न समूहों के नौ आतंकी मॉडयूल का भंडाफोड़ किया गया।

अगस्त में लुधियाना रेलवे स्टेशन पर बब्बर खालसा इंटरनेशनल के एक सदस्य ने गोलीबारी की। पटियाला में राष्ट्रीय सिख संगत के एक सदस्य की मुठभेड़ में मौत और मनसा में डेरा के एक अनुयायी की मौत को पुलिस ने उग्रवाद से जोड़ा। राज्य के सहकारिता मंत्री और चार बार विधायक रह चुके कंवलजीत सिंह की मार्च में एक कार दुर्घटना में मौत हो गई। पूर्व मुख्यमंत्री हरचरण सिंह बरार का लंबी बीमारी से निधन हो गया।
   
राज्य सरकार ने रिलायंस इंडस्ट्रीज लि को फार्म टू फोर्क परियोजना के लिए रियायती दर पर 1,000 एकड़ जमीन आवंटित करने के पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के फैसले को निरस्त कर दिया। कर्ज से लदे किसानों की आत्महत्या की घटनाएं भी हुईं। एक अध्यादेश के माध्यम से राज्य सरकार ने पंजाब पुलिस अधिनियम को संशोधित किया ताकि अन्य राज्य कैडर के अधिकारियों को डीजीपी जैसे पद पर नियुक्त किया जा सके।
   

चिकित्सकीय लापरवाही की एक त्रासद घटना में पटियाला के सरकारी राजिन्दर अस्पताल में शार्ट सर्किट होने की वजह से, इन्क्यूबेटरों में रखे छह नवजात शिशुओं की जल कर मौत हो गई और पांच गंभीर रूप से घायल हो गए। स्वाइन फ्लू से सात मरीजों की मौत हुई।

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