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दो टूक (22 दिसंबर, 2009)

दिल्ली देहात के किसानों की ओर से राज्य में एक और विश्वविद्यालय के लिए जमीन देने की पेशकश अपने आप में एक मिसाल है। कौन नहीं जानता दिल्ली में जमीन सोने के भाव बिकती है। फिर भी किसान अगर मुफ्त जमीन देने को तैयार हैं तो इसके पीछे अपने बच्चों के भविष्य की उनकी चिंता है।

दिल्ली विश्वविद्यालय केंद्र सरकार के अधीन है, इसलिए देश भर से आने वाले प्रतिभाशाली छात्रों के साथ प्रतियोगिता में स्थानीय छात्रों को मौका नहीं मिल पाता। जमीन देने वाले किसानों को भरोसा है कि नया विश्वविद्यालय बना तो सरकार उनके बच्चों को तरजीह देगी। उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार उनके भरोसे को तोड़ेगी नहीं और दिल्ली के स्थानीय छात्र-छात्राओं के लिए उच्च शिक्षा के नए दरवाजे खुलेंगे।

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  • Web Title:दो टूक (22 दिसंबर, 2009)