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शिक्षक बने अब ‘इंजीनियर’

शिक्षक बन गए हैं इंजीनियर। जी हां यह सच है कि जिले के प्राइमरी और जूनियर स्कूल के शिक्षक अब इंजीनियर बन चुके हैं। और इन्हें इंजीनियर बनाया है सर्वशिक्षा अभियान की तमाम स्कूली निर्माण योजनाओं ने।

शिक्षक पढ़ाना छोड़कर सब कुछ कर सकते हैं, ऐसा सरकार सोचती है। यही कारण कि इस कार्य के उसने कोई अलग से इंजीनियर नियुक्ति करना उचित नहीं समझा। अब कार्य को शिक्षक ही करते हैं। उन्हें ही जमीन के चयन से लेकर निर्माण सामाग्री तक खरीदनी पड़ती है। यह सब तब हो रहा है जब प्राइमरी और जूनियर स्कूल भारी शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं।

जिले में सर्वशिक्षा अभियान के तहत सभी स्कूलों में निर्माण कार्य कराने होते हैं। और यह निर्माण कार्य शिक्षकों द्वारा कराया जाता है, यह जानते हुए भी कि वे निर्माण कार्य में क्या सहयोग करेंगे। यही कारण कि अधिकांश शिक्षकों को शिक्षण कार्य के स्थान पर निर्माण कार्य में लगे रहते हैं।

सर्व शिक्षा अभियान में स्कूल के लिए बिल्डिंग, शौचायल, किचन, बैठक रूम के अलावा स्कूलों में फर्निचर से लेकर स्कूल की बाउंड्री आदि के निर्माण के लिए पैसा आता है। यह पैसा ग्राम शिक्षा समिति के पास आता है। चूंकि बैंक में गांव के प्रधान और शिक्षक का संयुक्त खाता होता है, इसलिए पैसा दोनों के साइन से निकलता है और शिक्षक इसके बाद निर्माण कार्य में जुट जाता है।

जिलें में कुल 466 प्राइमरी और 212 जूनियर माध्यमिक  स्कूल हैं। और इन स्कूलों में कुल लगभग 11 सौ शिक्षक पढ़ाते हैं। जबकि इन स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या लगभग 77 हजार से अधिक है।

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