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और भी पुलिस अधिकारी रहे हैं सुर्खियों में

हरियाणा के पूर्व पुलिस महानिदेशक एस.पी.एस. राठौर अकेले ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जो आपराधिक गतिविधियों की वजह से आज सुर्खियों में हैं। प्रदेश में कई ऐसे पुलिस अधिकारी हैं जो उनके पहले या बाद में गलत कारणों की वजह से अखबारों में अपनी जगह बनाते रहे हैं।

शिवानी भटनागर हत्याकाण्ड में अभियुक्त तथा पुलिस महानिरीक्षक (जेल) रविकान्त शर्मा सज़ा पा ही चुके हैं। शर्मा पर इण्डियन एक्सप्रैस की पत्रकार शिवानी भटनागर की 1999 में दिल्ली में उसके घर में हुई हत्या में शामिल होने का आरोप है। एक पुलिस महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी हरीश कुमार को विदेशी मुद्रा विनिमय तस्करी रोकथाम अधिनियम (कोफेपोसा) के तहत गिरफ्तार किया गया था।

एक अन्य भूतपूर्व पुलिस महानिदेशक रमेश सहगल को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उनपर आरोप था कि उन्होंने एक कैदी की पेरोल की समय सीमा बढ़ाने के लिये रिश्वत ली थी। यह काण्ड जिस समय का है उस समय सहगल जेल के महानिदेशक थे। जब वे पुलिस महानिदेशक बने तो वे फिर से रिश्वत के विवाद में फंस गए।

इस बार उन पर आरोप था कि उन्होंने सिपाहियों की भर्ती में बिचौलियों के ज़रिए धन लिया। यह मामला जब काफी विवादस्पद बन गया तो सहगल को पद से हटा दिया गया।एक अन्य भूतपूर्व पुलिस महानिदेशक लक्ष्मण दास की गिरफ्तारी इस लिये की गई क्यों कि उनका नाम एक कथित कुख्यात अपराधी जितेन्द्र पहल की हत्या के मामले में विवाद में आया था। जितेन्द्र पहल के नाम पर लूट, हत्या, डकैती जैसे कई जघन्य अपराध थे और तमाम कोशिशों के बावजूद वह पुलिस की गिरफ्त में नहीं आ रहा था।

अन्तत: एक दिन पता चला कि वह पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारा गया। पहल की मां ने आरोप लगाया कि यह पुलिस मुठभेड़ फर्जी थी जब उसकी बात नहीं सुनी गई तो उसने पंजाब तथा हरियाणा हाई कोर्ट के समक्ष गुहार लगाई इस पर कोर्ट ने सी.बी.आई. की जांच के आदेश दिये। जांच के बाद लक्ष्मण दास को गिरफ्तार कर लिया गया।

जहां तक सुप्रीम कोर्ट से सज़ा पाने का सवाल है कुछ लोगों को गैरकानूनीरूप हिरासत में रखने के आरोप में एक आई.पी.एस. अधिकारी अनिल डाबरा, इंस्पैक्टर राजेन्द्र सिंह तथा श्यामलाल गोयल को कैद की सज़ा सुनाई गई थी। यह लोग बाद में राज्य सरकार द्वारा निलम्बित कर दिये गए।

इनके  अलावा एक नाबालिग को गैरकानूनी हिरासत में रखने के आरोप में एक अन्य आई.पी.एस. अधिकारी एम.एस. अहलावत भी सुप्रीम कोर्ट से दण्डित हो चुके हैं। उक्त नाबालिग पर रेलवे का सामान चुराने का आरोप था।

हरियाणा में प्रतिनियुक्ति पर काम कर चुके आई.पी.एस. अधिकारी आर.एस.यादव को  गिरफ्तार किया गया था जिस पर उनकी पत्नी श्रीमती अनूप यादव ने कहा था कि तत्कालीन मुख्य मंत्री ओम प्रकाश चौटाला तथा भाजपा के कुछ शीर्ष नेता उनसे बदला निकाल रहे हैं क्यों कि उनके पति ने हरियाणा में रहते हुए 1995 में चौटाला के दोनों पुत्रों क्रमश: अजय सिंह चौटाला व अभय सिंह चौटाला को गिरफ्तार किया था और गुजरात में काम करते हुए वहां के गृह मन्त्री हरेन पण्डया पर मुकदमा चलाने की इजाज़त मांगी थी। गुजरात काडर के अधिकारी यादव को जींद पुलिस ने पंचकूला से गिरफ्तार किया था।

यमुनानगर निवासी एक महिला ने पुलिस महानिरीक्षक सतर्कता, एम.एस. एहलावत, पर यौन शोषण का आरोप लगाया था। उसके अनुसार यह घटना उस समय की है जब उक्त पुलिस अधिकारी यमुनानगर में पुलिस अधीक्षक थे। इसमें जांच अवश्य हुई लेकिन अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।

दिसम्बर, 2007 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग हरियाणा के पुलिस महानिदेशक से इस बारे में रिपोर्ट भी मांग चुका है। यह केस पहली बार 2002 में उजागर हुआ था। एहलावत आरोपों को नकारते हुए कह चुके हैं कि उन्होंने कभी ऐसा नहीं किया। लड़की किस दबाव में उन पर ऐसे आरोप लगा रही है वे नहीं जानते।

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