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काश न्याय समय रहते मिला होता

मधु प्रकाश-आनन्द प्रकाश के जज्बे को सलाम। जिन्होंने अपनी बेटी की सहेली रुचिका गिरहोत्र के साथ हुए अन्याय के खिलाफ 19 साल की लड़ाई पूरी शिद्दत और मशक्कत से लड़ी और अन्तत: उस व्यक्ति को जेल तक पहुंचाया जिसके इशारे पर हरियाणा की पुलिस नाचती थी।

तमाम दबावों और धमकियों के बावजूद प्रकाश दम्पत्ति ने संघर्ष के प्रकाश को बुझने नहीं दिया। आनंद प्रकाश कहते हैं कि उन्होंने जंग तो जीत ली, और राठौर को सजा मिलने से संतुष्ट भी हैं, लेकिन मधु प्रकाश कहती हैं कि काश न्याय समय रहते मिला होता तो रुचिका आत्महत्या नहीं करती।

आनंद प्रकाश का कहना है कि आज के फैसले से यह साबित हो गया है कि रुचिका छेड़छाड़ मामला उठाए जाने के बाद रुचिका के भाई आशू के खिलाफ बनाए गए मामले झूठे थे। यह मामले सिर्फ रुचिका के परिवार पर दबाव बनाने के लिए ही थे।

उन्होंने कहा कि इस मामले को दबाने के लिए पहले राठौर ने उन्हें भी कई बार धमकाया, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी। राठौर को बचाने के लिए कई पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों और कुछ अन्य लोगों ने भी राठौर की मदद की।

अब फैसला राठौर के खिलाफ आ चुका है अत: वे अब राठौर की मदद करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वे रुचिका को आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला उठाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।

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