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रंगमंच का साथ, सार्त्र के देश में कर्नाड

मौलियर, सार्त्र और कामू के देश का रंगकर्म भरतमुनि और भारतेन्दु व जयशंकर प्रसाद के देश के रंगकर्म से जुगलबन्दी करेगा। अगले वर्ष विश्व रंगमंच दिवस 27 मार्च इस संगम का साक्षी बनेगा।

एक साझे प्रयास के तहत फ्रांस के रंगकर्मी ने लखनऊ के भारतेन्दु नाट्य अकादमी में आकर नाटक तैयार करने और फिर भारत एवं फ्रांस में इसके कई प्रदर्शन करने की योजना बनाई गई है। जल्द ही इस पर अमल शुरू हो जाएगा।

फ्रांस के असील रईस वहाँ फिल्म और रंगमंच के क्षेत्र में सक्रिय व्यक्तित्व हैं। वे प्रवासी भारतीय हैं और फिल्मांकन के सिलसिले में भारत आते रहते हैं। रईस ने भारतेन्दु नाट्य अकादमी से नाट्य प्रस्तुति का अनुबन्ध किया है। इसके तहत वह अकादमी आकर कार्यशाला करेंगे और फिर नाटक तैयार करेंगे।

नाटक में अकादमी के वर्तमान एवं पूर्व प्रशिक्षुओं के अतिरिक्त नगर के प्रमुख रंगकर्मी शिरकत करेंगे। नाटक का पहला मंचन 27 मार्च को लखनऊ में होगा और उसके बाद इसके कई प्रदर्शन फ्रांस के शहरों में होंगे। प्रदर्शनों से होने वाली आय में अकादमी की हिस्सेदारी भी होगी।

अकादमी के निदेशक सूर्यमोहन कुलश्रेष्ठ ने ‘हिन्दुस्तान’ को बताया कि इस संयुक्त प्रयास के लिए प्रसिद्ध अभिनेता एवं नाटककार गिरीश कर्नाड के नाटक ‘हयवदन’ का चुनाव किया गया है। उन्होंने बताया कि रईस 20 जनवरी को अकादमी आ रहे हैं।

वे यहाँ पहले 10 दिनों की कार्यशाला करेंगे जिसमें नाटक के पात्रों का चुनाव किया जाएगा। इसके उपरान्त नाटक का अभ्यास शुरू होगा। उनकी यात्रा, प्रस्तुति और उनके पारिश्रमिक का खर्च अकादमी को नहीं वहन करना होगा जबकि फ्रांस में होने वाली प्रस्तुतियाँ प्रायोजित होंगी।

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