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यूपी भाजपा की कमान संभालने को दौड़ में कई ‘गडकरी’

नितिन गडकरी द्वारा भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के साथ ही उत्तर प्रदेश में प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी के लिए दौड़ और तेज हो गई है। अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन और नए साल पर बधाई देने के नाम पर इस पद के उम्मीदवारों और उनके समर्थकों के दिल्ली की ओर कदम बढ़ गए हैं।

प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए 25 से 30 चर्चित चेहरों के अलावा अब तक खामोश बैठे कई ऐसे भी चेहरे यह सोचकर इस दौड़ में शामिल हो गए हैं कि जब गडकरी का भाग्य इतना जोर मार सकता है तो उनका भी भाग्य पलटा खा सकता है। संघ पदाधिकारियों की ड्योढ़ी पर भी भीड़ बढ़ गई है।

प्रदेश भाजपा में इस समय संगठनात्मक चुनावों का दौर चल रहा है। ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष पद पर जिसे बैठाया जाएगा, उसका बाकायदा चुनाव होगा। पार्टी के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष डा. रमापति राम त्रिपाठी ने 2007 में यह पद सम्भाला था। राजनाथ सिंह के खासमखास माने जाने वाले डा. त्रिपाठी को मनोनीत किया गया था। भाजपा संविधान के तहत अध्यक्ष का कार्यकाल तीन साल का होता है। इस तरह उनका कार्यकाल अभी पूरा नहीं हुआ है।

दूसऱे, संघ ने प्रमुख पदों के लिए  55 वर्ष से 65 वर्ष की आयु की सीमा रखी है। डा. त्रिपाठी का अभी हाल में 58वाँ जन्मदिन मनाया गया था।  इसी आधार पर पार्टी का एक प्रभावशाली खेमा डा. त्रिपाठी को ही प्रदेश अध्यक्ष पद पर बनाए रखने के पक्ष में है लेकिन कुछ अन्य खेमे इस पद पर नया चेहरा लाने के पैरोकार हैं जो अपेक्षाकृत युवा हो  और जनता में जिसकी अच्छी पहचान हो।

अध्यक्ष पद के लिए प्रदेश भाजपा के अधिकाँश पदाधिकारी दौड़ में हैं। इनमें सबसे चौंकाने वाला नाम भाजपा में संघ के प्रतिनिधि व महामंत्री संगठन नागेन्द्र नाथ का है। अभी तक वे एक अन्य महामंत्री के नाम के सबसे बड़े पैरोकार थे मगर अब दौड़ में खुद शामिल हो गए हैं।

श्री नाथ के अलावा सूर्य प्रताप शाही, स्वतंत्रदेव सिंह, लखनऊ के मेयर डा. दिनेश शर्मा, हुकुम सिंह, संतोष गंगवार, राजेश अग्रवाल, जय प्रकाश चतुर्वेदी, लल्लू सिंह, विनोद पाण्डेय, अशोक कटारिया, महेन्द्र सिंह आदि नेताओं के नाम प्रमुखता से चल रहे हैं। कल्याण सिंह और उमा भारती जैसे नेताओं की भरपाई के लिए बरेली के लोध नेता धर्मपाल सिंह का नाम भी प्रमुखता से  चल रहा है।

वैसे, पार्टी के लोगों का मानना है कि उत्तर प्रदेश के बारे में निर्णय लेना आसान नहीं है। पार्टी  अभी तक यहाँ के बदले राजनीतिक व सामाजिक समीकरणों को पूरी तरह से समझ नहीं सकी है। लगातार प्रयोग किए गए मगर भाजपा का ग्राफ नहीं उठा। उम्मीद की जा रही है कि भाजपा की नई केन्द्रीय टीम बनने के बाद उत्तर प्रदेश पर निर्णय ले लिया जाएगा।

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