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ठंड में भी आंदोलनों से गरमाई घाटी

क्षेत्र में ठंड पड़ने लगी है लेकिन आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। पूरा जिला आंदोलनों की गरमाहट में जूझ रहा है। कई संगठन अलग-अलग मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं।अलग ब्लाक और तहसील की मांग को लेकर किड़ई-पचार में चल रहा ग्राम प्रधानों और ग्रामीणों का क्रमिक अनशन जारी है।

ग्राम प्रधान ब्लाक और तहसील के साथ ही नौ सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलित हैं। विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों का उन्हें लगातार समर्थन मिल रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री तथा राज्य सभा सदस्य भगत सिंह कोश्यारी ने आंदोलनकारियों से फोन पर उनकी मांगों पर चर्चा की।

कोश्यारी के आश्वासन के बाद उन्होंने प्रस्तावित आमरण अनशन को टाल दिया था। प्रधान अब जनवरी में जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करने की तैयारी में हैं। उत्तरायणी मेले के दौरान सरयू बगड़ में लगने वाले राजनैतिक अखाड़ों में भी प्रधानों की मांगें प्रमुख रूप से उठेंगी। विपक्ष प्रधानों को अपने पक्ष में खड़ा करने के लिए तैयारी करने लगा है।

प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय के समक्ष अनशन पर बैठे लीसा ठेकेदारों का आंदोलन भी जारी है। पांच साथियों को जिला प्रशासन ने जबरन उठाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया है। उनके स्थान पर पांच अन्य ठेकेदार अनशन पर बैठ गए हैं।

नियुक्ति और पेंशन की मांग को लेकर दो महीने से आंदोलित गुरिल्ले भी उत्तरायणी मेले के दौरान प्रदर्शन करने की तैयारी में लगे हुए हैं। रेल संघर्ष समिति के अध्यक्ष गुसाई सिंह दफौटी ने कहा कि उत्तरायणी मेले के दौरान संघर्ष समिति जुलूस निकालेगी।

फरवरी से पुन: जंतर-मंतर दिल्ली में धरना प्रदर्शन का भी कार्यक्रम तय कर लिया गया है। सोमवार से उत्तराखंड की विधानसभा में चलने वाले शीतकालीन सत्र में भी बागेश्वर जिले की मांगें गुंजायमान होने के पूरे आसार हैं। कुल मिलाकर ठंड के बावजूद भी आंदोलनों से बागेश्वर घाटी गरमाई हुई है।

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