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नए साल में झेलनी होगी भारी बिजली कटौती

नये साल के आगाज के साथ ही उत्तर प्रदेश वासियों को भारी बिजली कटौती से जूझना होगा। केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण की लोड जेनरेशन बैलेंस रिपोर्ट में यह आशंका जताई गयी है कि शुरुआती तीन महीनों के दौरान बिजली की मांग और आपूर्ति में 60 से 70 मिलियन यूनिट प्रतिदिन का अंतर संकट को और बढ़ायेगा।

नार्दर्न रीजन पावर कमेटी (एनआरपीसी) की शीघ्र ही होने वाली बैठक में बिजली की सम्भावित किल्लत से निबटने की कवायद ही मुख्य मुद्दा रहेगी।

एनआरपीसी सूत्रों के मुताबिक जनवरी में प्रदेश में बिजली की मांग 212 मिलियन यूनिट प्रतिदिन रहेगी जबकि सभी स्नोतों से उपलब्धता मात्र 152 मिलियन यूनिट ही होगी। परिणामस्वरूप लगभग 28.2 प्रतिशत की कमी बनी रहेगी।

पीक आवर्स में बिजली की मांग शुरुआती तीन महीनों में 9550 मेगावाट से 9950 मेगावाट तक रहने की उम्मीद है जबकि उपलब्धता लगभग 6500 मेगावाट ही हो सकेगी। 3000 मेगावाट बिजली की कमी से प्रदेश को ठंड के दिनों में भी झेलना होगा।

सीईआरसी के कड़े रुख के बाद ग्रिड से कोटे से अधिक बिजली खरीदना भी बिजली विभाग के लिए खासा मुश्किल हो सकता है।

उल्लेखनीय है कि ग्रिड कोड उल्लंघन के साथ ही 30 नवम्बर तक ग्रिड से खरीदी गयी महंगी बिजली का कुल बकाया 723.96 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है जिसमें महज 79.63 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं हो पाया है।

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