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हादसों को न्यौता दे रहीं खराब सड़कें

खराब सड़कों से बेपरवाह प्रशासन ने शहर को जैसे उसके हाल पर छोड़ दिया है। सड़कें तो सड़कें, ओवर ब्रिज तक ऊबड़-खाबड़ होते जा रहे हैं। आए दिन हादसे हो रहे हैं। मगर अफसरों के पास इस ओर सोचने तक की फुर्सत नहीं।

ओवरलोड यातायात, हर तरफ जाम और रेंग-रेंगकर चलते वाहन जैसे इस शहर की किस्मत बन गए हैं। जाम से निजात दिलाने को ओवर ब्रिज बन रहे हैं। कुछ बन चुके हैं, कुछ का निर्माण चल रहा है। अफसोस, सही रख रखाव न होने की वजह से पहले बने ओवर ब्रिज तक खस्ताहाल होते जा रहे हैं। कुछ ऐसी ही कहानी केलिनबर्थ ओवर ब्रिज की है, जिस पर शुरू से आखिर तक सड़क की दशा तो खराब हो ही गई है, बल्कि अब सड़क गड्ढों की शक्ल भी लेने लगी है।

इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति और क्या होगी कि जीडीए दफ्तर के ठीक सामने पुल पर गढ्डा होने की वजह से कितने ही बाइक सवार हादसे का शिकार हो चुके हैं, मगर जीडीए और पीडब्लूडी के अफसरों को यह सब नजर नहीं  आ रहा। डासना क्रासिंग से ठाकुरद्वारा तक जगह-जगह सड़क की यही हालत है।

एएलटी रोड पर ट्रेफिक बंद किए जाने के बाद से केलिनबर्थ ब्रिज पर वाहनों का दबाव और बढ़ गया है मगर सड़क की हालत सुधारने का काम फिर भी नहीं किया जा रहा। शहर की बाकी सड़कें भी इसी तरह कराह रही हैं। प्रमुख सचिव ने काफी समय पहले सड़कों को गड्ढामुक्त करने के आदेश दिया था। चार महीने में भी प्रशासन सड़कों की सूरत नहीं संवार सका है।

 

 

 

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