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1 जून, 2020|7:22|IST

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दो टूक (सोमवार, 21 दिसंबर 2009)

किसी भी बड़े आयोजन से पहले उसकी तैयारी के बारे में तमाम तरह के नुक्स निकाले जाते हैं, कुछ लोग विफल होने की आशंका जताते हैं। इनकी वजह से आयोजक कमर कस लेते हैं और किसी तरह की गफलत में नहीं रहते। नतीजा-सारी तैयारी समय पर हो जाती है। दिल्ली में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के साथ भी ऐसा ही हो रहा है। कोई तैयारी से संतुष्ट है तो किसी को संदेह है।

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  • Web Title:दो टूक (सोमवार, 21 दिसंबर 2009)