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कुंभ के बाद होंगे सौ करोड़ के काम

कुंभ के कार्यों पर वित्त का पेच फंस सकता है। करीब सौ करोड़ के जिन कार्यों के लिए अभी वित्तीय स्वीकृति जारी नहीं हुई है उनमें से ज्यादातर के मामले में अप्रैल तक प्रतीक्षा करनी पड़ेगी। विशेष मामलों में सीएम की हरी झंडी के बाद ही स्वीकृति मिलेगी।

कुंभ के अंतर्गत 500 करोड़ से अधिक के कार्य होने हैं। इनमें जेएनयूआरएम आदि योजनाओं के कार्य भी शामिल कर लें तो कुंभ क्षेत्र और आसपास के नगरीय क्षेत्रों में 565 करोड़ से अधिक के कार्य प्रस्तावित हैं। इन योजनाओं/कार्यों के लिए सैद्धांतिक सहमति मिल चुकी है और अब तक 375 करोड़ रुपये जारी हो चुके हैं।

इनमें से 240 करोड़ से अधिक के काम हो चुके हैं, लेकिन अब राह मुश्किल है। इसकी बड़ी वजह यह है कि प्रदेश का खजाना खाली है और वित्त विभाग हाथ खड़े करने की स्थिति में है। बताया गया है कि कुंभ क्षेत्र से बाहर की कुछ सड़कों और विधायकों के प्रस्तावों के लिए नए वर्ष के बजट से ही पैसा जारी होगा।

ऐसी स्थिति में ये कार्य आगामी अप्रैल-मई से पहले आरंभ होने की स्थिति में नहीं होंगे। बताया गया है करीब सौ करोड़ के कार्यों में फंस पेच सकता है। यानी, प्रदेश की वित्तीय स्थिति और न बिगड़ी तो कुंभ से संबंधित कुल वित्तीय स्वीकृतियां 450-460 करोड़ की सीमा पार नहीं कर पाएंगी। यह स्तर भी केंद्र से मिले 220 करोड़ के बाद ही छुआ जाने के आसार बने हैं।

हाल में, सीएम के स्तर से सौ करोड़ से अधिक के लिए हरी झंडी दी गई है। सूत्रों के अनुसार, उपयरुक्त स्वीकृति के बाद वित्त विभाग ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि अब उन्हीं कार्यों के लिए स्वीकृति दी जाए बेहद अनिवार्य हों।

बताया गया है कि वित्त विभाग ने इस बात पर चिंता जताई है कि संबंधित प्रशासनिक विभाग सीधे
मुख्यमंत्री-कार्यालय प्रस्ताव भेज रहे हैं। वित्त का तर्क है कि किसी भी कार्य में सीएम की सहमति के बाद वित्त विभाग के पास विचार करने जैसा कोई अधिकार नहीं रहता।

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