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रोबोट बदल रहे हैं हमारी जिंदगी

ऐसा मशीनी इंसान जिसके हाथ, पांव, आंख, कान सब कुछ है, वह चलता भी है, बोलता भी है और वो सारे काम करता है जो आप उसे कहते हैं। भावविहीन, संवेदनहीन इस मशीन को जीता-जागता इंसान बनाने की कोशिशें जारी हैं। बता रहे हैं अनुराग मिश्र

आप जो कार, बाइक चलाते हैं या फिर जिस बस, ट्रेन में आप सफर करते हैं यहां तक कि जो कपड़े आप पहनते हैं और जिस सामान को आप खरीदते हैं उसमें भी कहीं न कहीं रोबोट शामिल होता है। रोबोटिक्स, रोबोट से संबंधित विज्ञान और टेक्नोलॉजी है। इसके माध्यम से रोबोट के डिजाइन, निर्माण और अनुप्रयोगों के बारे में जानकारी मिलती है। सामान्यत: रोबोट की संरचना मैकेनिकल होती है, इसे काइनेमेटिक चेन (गीतिकीय श्रृंखला) कहते हैं। इसकी संरचना मानव के कंकाल की तरह ही होती है। चेन लिंक (उसकी हड्डियों), एक्युटेर्स (मांसपेशियों) और जोड़ों से मिलकर बनती है। ज्यादातर समकालिक रोबोट की संरचना मानव की तरह ही होती है। इसे बिल्कुल मानवीय अंगों के काम करने के तौर-तरीकों के आधार पर बनाया जाता है। इस तरह के रोबोट को सीरियल रोबोट कहा जाता है। रोबोटिक्स शब्द का पहली बार इस्तेमाल इस्साक आसिमोव ने अपनी विज्ञान कथा ‘लायर’ में किया था। आसिमोव ने 1950 में प्रकाशित अपनी किताब ‘आई रोबोट’ में रोबोटिक्स से संबंधित तीन नियम भी दिए थे, जिन्हें आज रोबोटिक्स के नियमों के तौर पर जाना जाता है। पहले नियम के मुताबिक रोबोट कभी किसी मानव को हानि नहीं पहुंचाता है। दूसरे नियम के अनुसार बिना पहले नियम का उल्लंघन किए रोबोट मानव द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करेगा। तीसरे नियम के अनुसार बिना दोनों नियमों का उल्लंघन किए हुए रोबोट अपना बचाव करेगा। रोबोटिक्स शब्द रोबोट पर आधारित है, रोबोट शब्द का पहली बार इस्तेमाल चेक लेखक कार्ल केपेक ने अपने नाटक आर.यू.आर (रोसम यूनिवर्सल रोबोट) में किया था। इस नाटक का प्रदर्शन प्राग में किया गया था।
मूवमेंट के लिए रोबोट में लगाए जाने वाले एक्यूटर्स मानव की मांसपेशियों की तरह होते हैं। यह वह हिस्सा होते हैं जिसमें एकत्रित ऊर्जा की वजह से क्रियाशीलता आती है। सबसे प्रसिद्ध एक्यूटर्स के तौर पर इलेक्ट्रिक मोटर का प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा, स्टीपर मोटर, पीजो मोटर आदि का भी इस्तेमाल होता है। कांप्लेक्स होने से बचाने के लिए रोबोट में चार पहियों का इस्तेमाल किया जाता है। किसी भी सतह पर रोबोट के चलने का जबाव ढूंढ़ना वैज्ञानिकों के लिए बड़ी समस्या थी। शुरुआत में इसके लिए जेडएमपी तकनीक का प्रयोग किया गया, तो वर्तमान में डायनमिक बैलेंसिग और पैसिव डायनेमिक्स तकनीक खासी प्रचलित है।

बढ़ रही है रोबोट की मांग
मौजूदा समय में तकरीबन 11 लाख इंडस्ट्रियल रोबोट हैं और दस लाख घरेलू रोबोट। वर्तमान में कई रोबोट इंडस्ट्रियल कार्य कर रहे हैं जो एक दिमाग रहित मशीन की तरह है। हालांकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में कंप्यूटर ने एक क्रांतिकारी परिवर्तन ला दिया है। संयुक्त राष्ट्र संघ की हालिया प्रकाशित एक रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि एक साल में रोबोट की बिक्री में तीन गुना इजाफा हुआ है।

युद्ध में रोबोट
युद्ध क्षेत्र में रोबोट तकनीक में जबरदस्त बदलाव हुआ है। यूएवी (अनमैंड एरियल व्हीकल) रिमोट द्वारा नियंत्रित विमान है जैसे अमेरिकन सेना का ड्रोन जिसने हाल में श्रीलंकाई क्रिकेट टीम पर आतंकी हमले के मास्टरमाइंड, खूंखार तालिबानी कमांडर बैतुल्ला मेहसूद को मारा था। यह रोबोफाटर विमान बिना पायलट के चलता है और अपने दुश्मन को खोज कर तुरंत ही उसका सफाया कर देता है। एक बार में लगातार 24 घंटे तक 26,000 फीट की ऊंचाई तक आकाश में रहने वाला ये रोबोफाइटर अमेरिकन आर्मी का मुख्य हथियार है।

अंतरिक्ष और समुद्र में रोबोट
अंतरिक्ष में खोज करने के लिए नासा ने कई रोबोट विकसित किए हैं। इन रोबोट को विकसित करने के पीछे नासा का मुख्य मकसद है कि मनुष्यों को अंतरिक्ष की किसी भी खतरनाक स्थिति से बचाया जा सके। उदाहरण के तौर पर रोबोनॉट एक रिमोट द्वारा ऑपरेटेड रोबोट है जो एस्ट्रोनॉट के स्थान पर अंतरिक्ष में स्पेस वॉक करेगा।
इसके अतिरिक्त नासा ने मंगल पर ‘रोबोटिक रोवर’ भेजा है। रोबोटिक सबमेरीन को रिमोट ऑपरेटेड वेहिकल और आरओवी के तौर पर भी जाना जाता है। यह गहरे समुद्र और बर्फ से पटे हुए पानी के भीतर रहस्यों को तलाशने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं।
चिकित्सा के क्षेत्र में रोबोट
आपरेशन करने के लिए बेहर स्किल के साथ बेहतर नियंत्रण की आवश्यकता होती है। इस लिहाज से रोबोट मुफीद होते हैं। हालांकि शुरुआत में आलोचकों का कहना था कि रोबोट इस काम के लिए बेहतर नहीं है, लेकिन हकीकत इससे पूरी तरह अलग है। हाल ही में इसका सफल नमूना ‘दा विंची रोबोटिक सíजकल सिस्टम’ है जिसके द्वारा गाल ब्लैडर, ब्रेन सजर्री और हार्ट बाइपास किया गया था। इसी तरह छोटे, वायरलैस और रोबोटिक कैमरा कैप्सूल का प्रयोग कर रोगी के पाचक तंत्र को डायग्नोज करने का काम किया जाता है। वहीं ब्रेस्ट कैंसर को स्कैन करने के लिए रोबोट हैंड विकसित किए गए हैं। डेंटिस्ट रोबोटिक डेंटल ड्रिल का प्रयोग इंप्लांट डेंटल सजर्री के लिए करते हैं। यह सजर्री सस्ती होने के साथ जल्दी होती है और इसमें दर्द भी कम होता है।
रोबोटिक साइंस की चुनौतियां
रोबोटिक साइंस ने तरक्की तो काफी कर ली है, लेकिन अभी रोबोटिक विज्ञान के सामने कई चुनौतियां हैं। बेहतर एक्यूरेटर्स (रोबोटिक के मूवमेंट का नियंत्रण), सेंसर (यह सुविधा देती है कि यह अपने अनुरूप माहौल तलाश सके) बना पाने में दिक्कतें आ रही हैं। मौजूदा मोटर और हाइड्रोलिक या न्यूमेटिक एक्यूरेटर्स कमजोर या बेहद भारी हैं। हालांकि आर्टिफिशियल मांसपेशियां इस समस्या का हल हैं, लेकिन ये इतनी कमजोर साबित हुई कि उन्हें एक छोटा सा बच्चा भी पटक देने में सक्षम था। बाइपैडल और ह्यूमनॉइड रोबोट के साथ भी कई दिक्कतें हैं। पहियों के सहारे और कीड़ों की तरह चलने वाले रोबोट ज्यादा सफल होते हैं क्योंकि इनका संतुलन बना पाना आसान होता है। इसी तरह रोबोटिक बांह और हाथ पर शोध जारी है। रोबोट आदमी की तरह बोल सकें, यह शोध जारी हैं।

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