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डेट मैनेजमेंट

ज्यादातर निवेशक अपने इक्विटी पोर्टफोलियो को लगातार चेक करते हैं और एक्सपर्ट से इस बारे में राय भी मांगते हैं कि कैसे अपने पोर्टफोलियो को बेहतर बनाएं यानी पोर्टफोलियो बैलेंस रहे, वह ऐसा रहे कि समय के अनुसार उसमें आप कुछ अतिरिक्त खरीद और बेच सकें। इक्विटी के मामले में तो यह आम होता है, लेकिन डेट पोर्टफोलियो के बारे में लोग मैनेज करने के मामले में अकसर चूक जाते हैं। 
समय: डेट पोर्टफोलियो को मैनेज करने के लिए समय खासा अहम रोल अदा करता है। इसमें आपको लोन के रीपेमेंट के बारे में, इक्विटी को होल्ड या निवेश करने के बारे में फैसला लेना होता है।
कमाई: निर्णय करने के लिए विभिन्न डेट से हुई आय का आकलन करना जरूरी है। यह चेक करना होगा कि उसका कौन सा निवेश आशानुरूप प्रदर्शन नहीं कर रहा, साथ ही वह फायदे में नहीं है। ऐसे में उसे किसी बेहतर प्रदर्शन करने वाले फंड से बदलें। निवेशक ख्याल रखे कि उसके द्वारा किया गया निवेश उसे बेहतर रिटर्न दिला सके।
क्या करना है अदा: अपना पोर्टफोलियो चेक करें। साथ ही यह चेक करें कि उसकी वर्तमान में जिनके लिए दर अदा करनी है, उनके रेट क्या हैं, जांच लें। साथ ही इसके आधार पर ही यह आकलन करें कि आपको प्राथमिकता के आधार पर किसका पेमेंट करना है।
गौर करें
अपने डेट पोर्टफोलियो का आकलन करते रहें।
कमाई के अनुसार निवेश में परिवर्तन करते रहें। ऐसे में जो निवेश लंबे समय से फायदा न दे रहा हो, उसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले निवेश से बदल दें।

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