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सहवाग की अगुवाई में बढ़त हासिल करने उतरेगी टीम इंडिया

सहवाग की अगुवाई में बढ़त हासिल करने उतरेगी टीम इंडिया

करिश्माई कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के दो मैचों के प्रतिबंध के बाद भारतीय टीम कार्यवाहक कप्तान वीरेंद्र सहवाग की अगुवाई में सोमवार को श्रीलंका के खिलाफ तीसरे वनडे मैच में अपनी सारी चिंताओं को भुलाकर पांच मैचों की सीरीज में बढ़त हासिल करने की कोशिश करेगी।

खराब फील्डिंग और गेंदबाजी की परेशानियां ही काफी नहीं थी कि टीम इंडिया को अपने प्रेरणादायी कप्तान धोनी के दो मैचों में प्रतिबंध का झटका झेलना पड़ा। दूसरे वनडे में नागपुर में धीमी ओवर गति के कारण आईसीसी ने शतक जड़ने वाले भारतीय कप्तान को यह सजा सुनाई।

भारत के लिए एक और चिंता का विषय युवराज सिंह हैं क्योंकि उंगली की चोट और फ्लू के कारण शुरूआती दो मैच नहीं खेलने वाले इस बल्लेबाज का खेलना संदिग्ध है। हालांकि उन्हें 15 सदस्यीय टीम में बरकरार रखा गया है।

धोनी की अनुपस्थिति में तमिलनाडु के विकेटकीपर बल्लेबाज दिनेश कार्तिक को टीम में बुलाया गया है जबकि स्वाइन फ्लू से उबरने वाले एस श्रीसंत की जगह ईशांत शर्मा ने ली है। श्रीलंकाई टीम में भी चोटों की समस्या बरकरार है। नागपुर में तीन विकेट की जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले ऑलराउंडर एंजेलो मैथ्यूज भी नागपुर में मांसपेशियों के खिंचाव के कारण घर लौट गए।

श्रीलंका के स्पिनर मुथैया मुरलीधरन और तेज गेंदबाज दिलहारा फर्नांडो भी ऊंगली की चोट के कारण घर लौटना पड़ा। दोनों टीमें 1-1 से बराबर है और तीसरे डे-नाइट मुकाबले का परिणाम सीरीज के लिए काफी अहम होगा।

पांच मैचों की सीरीज में अगर भारतीय टीम को बढ़त हासिल करनी है तो उन्हें गेंदबाजी और फील्डिंग विभाग की कमियों से पार पाने के अलावा अपनी बल्लेबाजी की ताकत से भरपूर फायदा उठाना होगा। टीम का भाग्य हालांकि शुरूआत पर भी निर्भर करता है इसलिए अनुभवी सचिन तेंदुलकर और सहवाग का प्रदर्शन काफीमायने रखेगा।

भारतीय टीम ने नागपुर में शुरू में सहवाग और गौतम गंभीर के विकेट गंवा दिए थे और धोनी के शतक के बावजूद वे ज्यादा बड़ा स्कोर नहीं बना सके। धोनी ने मैच के बाद कहा था कि हमारी शुरूआती अच्छी नहीं थी। हमने कुछ भागीदारियां तो बनाई, लेकिन लगातार अंतराल पर विकेट गंवाते रहे।

फील्डिंग टीम के लिए चिंता बना हुआ है और धोनी ने भी इस पर खिलाड़ियों का बचाव नहीं किया। उन्होंने कहा कि हम विश्व की सर्वश्रेष्ठ फील्डिंग टीम नहीं हैं। हमें फील्डिंग की खामियों को बराबर करने के लिए 20 से ज्यादा रन और बनाने चाहिए थे।

श्रीलंकाई टीम हालांकि नागपुर में जीत के बाद आत्मविश्वास से भरी होगी। मेहमान टीम इस बात से संतुष्ट होगी कि पिछले दो मैचों में उनकी बल्लेबाजी शानदार रही है और उन्हें उम्मीद होगी कि सोमवार को भी ऐसा ही होगा।

सलामी बल्लेबाज तिलकरत्ने दिलशान लगातार शतक जड़कर श्रीलंका के लिए शो स्टॉपर रहे हैं। उन्होंने नागपुर में 113 गेंदों पर 123 रनों की पारी खेलकर टीम को तीन विकेट की जीत दिलाई और राजकोट में भी बड़े स्कोर का पीछा करते हुए वह टीम को जीत के करीब तक ले गए थे, जिसमें उन्हें तीन रन से हार मिली।

जीत के लिए 415 रन के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए दिलशान ने 124 गेंद में 160 रन बनाए थे। दिलशान के अलावा कप्तान कुमार संगकारा और सलामी बल्लेबाज उपुल थरंगा भी अच्छी फॉर्म में हैं। भारत की तरह श्रीलंकाई टीम को भी गैर-अनुभवी गेंदबाजी और फील्डिंग विभाग में एक-दो समस्याएं हैं। चोटों ने उनके गेंदबाजी विभाग को काफी प्रभावित किया है। मुरलीधरन और फर्नांडो के बाद मैथ्यूज के जाने से समस्या बढ़ गई हैं।

टीम इंडिया के लिए बाराबाती भाग्यशाली रहा है, उसने आठ में जीत दर्ज की, चार गंवाए और एक मैच बारिश के कारण रद्द हुआ है। लेकिन श्रीलंका के खिलाफ यहां उनका रिकॉर्ड अच्छा नहीं है और 1990 में दोनों टीमों के बीच यहां खेले गए इकलौते मैच में घरेलू टीम को हार मिली थी।

दोनों टीमें इस प्रकार हैं:-

भारत: वीरेंद्र सहवाग (कप्तान), सचिन तेंदुलकर, गौतम गंभीर, युवराज सिंह, सुरेश रैना, रविंदर जडेजा, दिनेश कार्तिक, हरभजन सिंह, जहीर खान, प्रवीण कुमार, आशीष नेहरा, प्रज्ञान ओझा, ईशांत शर्मा, सुदीप त्यागी और विराट कोहली।

श्रीलंका: कुमार संगकारा (कप्तान), तिलकरत्ने दिलशान, सनत जयसूर्या, महेला जयवर्धने, तिलिना कांदाम्बी, चामरा कापूगेदारा, नुआन कुलाशेखरा, लसिथ मलिंगा, अजंता मेंडिस, तिलन समरावीरा, उपुल थंरगा, चनाका वेलेगेदारा, मुथुमुडालिगे पुष्पकुमारा, सूरज रणदीव और तिसारा परेरा।

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