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अब सब बूझोगे खग की भाषा

अब सब बूझोगे खग की भाषा

पक्षियों की बोली-भाषा मनुष्य के लिए अबूझ पहेली रही है। इसीलिए ‘खग जाने खग की भाषा’ जैया मुहावरा अस्तित्व में आया। लेकिन पक्षियों की भाषा की पहेली को सुलझाने के प्रयास वैज्ञानिकों ने शुरू कर दिए हैं। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के जन्तु एवं पर्यावरण विभाग की पक्षी संवाद प्रयोगशाला में बुश चैट पक्षी की भाषा के ध्वनि संकेतों के माध्यम से 80 अक्षर तैयार कर लिए गए हैं। इंडियन चैट पक्षी की भी वर्णमाला तैयार की जा रही है।

पर्यावरण एवं जंतु विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो. दिनेश भट्ट ने बताया कि इन ध्वनियों के माध्यम से पक्षियों की गतिविधियों का पता पहले ही चल जाता है। पक्षियों में आपस में संघर्ष से पहले की तैयारियां, प्रजजन क्षेत्र की रक्षा तथा अपने क्षेत्र में दूसरे पक्षी के प्रवेश न करने की हिदायत को आसानी से समझा जाने लगा है। उन्होंने बताया कि बुश चैट सुबह चार बजे अपने प्रजनन क्षेत्र में लगभग एक घंटे तक विभिन्न लय एवं आवृत्तियों से बने गीतों का प्रसारण करके आसपास के नरों से संवाद स्थापित करती है।

पर्यावरण प्रयोगशाला के वरिष्ठ रिसर्च एसोसिएट डॉ. विनय कुमार सेठी ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के लिए विज्ञान एवं तकनीकी मंत्रालय भारत सरकार से 20 लाख रुपये का अनुदान मिला है। बुश चैट का काम पूरा होते ही अन्य पक्षियों की भाषा वर्णमाला तैयार करने का काम शुरू किया जाएगा।

 

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  • Web Title:अब सब बूझोगे खग की भाषा