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किसानों को लूट रहे फर्जी राइस मिलर्स

किसानों से धान खरीद कर भारी मुनाफा कमा रहे है फर्जी राइस मिलर्स। जिलों से बड़ी संख्या में शिकायतें मिलने के बाद खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने चावल मिल मालिकों पर सख्ती बढ़ा दी है। विभाग ने सभी जिलों में संचालित चावल मिलों का पूरा ब्योरा मांगा है ताकि यह पता चले कि चालू खरीफ मौसम में किसी मिल को कितना धान मिला और उसने कूटाई करके कितना चावल भारतीय खाद्य निगम को जमा कराया। 


गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षो के दौरान राज्य में धान की सरकारी खरीद में भारी इजाफा हुआ है। इसी क्रम में विभाग को यह भी पता चला कि कई मिलें किसानों से औने-पौने भाव पर धान खरीदने के बाद सरकारी एजेंसियों को चावल बेचकर भारी मुनाफा कमा रही है। इस बाबत राइस मिलर्स एसोसिएशन ने भी सरकार से शिकायत की थी कि कुछ लोग फर्जी मिल मालिक बनकर सरकारी एजेंसियों को चावल बेच रहे हैं। इसी आधार पर विभाग ने मिल मालिकों का वैट नंबर, एसएसआई रजिस्ट्रेशन नंबर, पीएफ रजिस्ट्रेशन नंबर, पैन नंबर, प्रदूषण नियंत्रण लाइसेंस, फैक्ट्री लाइसेंस और ऑडिट बैलेंसशीट का पूरा ब्योरा मांगा है। कागजातों की जांच के बाद ही सरकारी एजेंसियां किसानों से खरीदा गया धान मिलिंग के लिए इन्हें देंगी। 


विभागीय सूत्रों के अनुसार सभी डीएम को राइस मिलों की उत्पादन क्षमता की जांच कराने का आदेश दिया गया है ताकि यह पता चल सके कि वहां प्रतिदिन कितना धान आया, कितना धान कूटा गया और कितनी मात्र में चावल बेचा गया। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर कोई मिल मालिक लेवी नहीं देता पाया गया तो उसका लाइसेंस भी रद्द कर दिया जाएगा।

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