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नीतीश की जय-जय,अधिकारियों की फजीहत

 ‘मीरा ने माला जपी श्याम की, किसानों ने ओढ़ ली चदरिया नीतीश के नाम की’। किसानों की पंचायत जुटी तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए किसानों ने कुछ इसी अंदाज में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। लेकिन जब बात आई अधिकारियों की सब गुड़ गोबर हो गया। खूब फजीहत हुई उनकी। यह तो अच्छा यह था कि बैंक का कोई अधिकारी वहां नहीं था अन्यथा शिकायत सुन उनके कान पक जाते। मौका था प्रखंड स्तरीय कृषक सलाहकार समिति के अध्यक्षों के उन्मूखीकरण का।

तरामंडल के सभागर में शनिवार को बामेति द्वारा आयोजित कार्यक्रम में सूबे के हर जिले से आये किसान प्रतिनिधियों ने अपनी बातें रखी। अधिसंख्य जिलों के किसानों ने साफ कहा कि आजतक बिहार के किसी मुख्यमंत्री ने किसानों की इतनी सुधि नहीं ली। किसानों ने ही पिछली सरकार को 15 साल का मौका दिया था। इस सरकार को तीस साल मिलेगा। लेकिन प्रखंड से लेकर जिला स्तर तक के अधिकारियों को नीतीश सुधार दें। या फिर हर योजना का लाभ सीधे किसानों को दे दिया जाय। फिर देखिये किसान कैसा रिजल्ट देते हैं। पंचायती राज व्यवस्था पर भी अंगुली उठी। कई किसान प्रतिनिधियों ने तो यहां तक कहा कि पंचायतों में भेजे गये बीज और डीजल अनुदान का लाभ चाय बेचने वाले और भाड़े पर ट्रैक्टर चलाने वालों को दिया गया और किसान मारे-मारे फिरते रहे। मधुबनी के लालबाबू सिंह ने कहा कि सूबे में सबसे पहला ई किसान भवन उनके जिले में बना। लेकिन उनपर अधिकारियों का कब्जा है। किसी किसान को वहां फटकने नहीं दिया जाता। फूदन राय, पूर्वी चमरण के अवधेश कुशवाहा, सारण के ब्रजेश कुमार, सीतामढ़ी के रामविनोद पांडेय, रोहतास के सूर्यवंश सिंह पटेल, मोतिहारी के विश्वनाथ प्रसाद और मुंगेर के मुकुंद प्रसाद सिंह ने साफ कह दिया कि सरकार सिंचाई की और बिजली की व्यवस्था ठीक कर सारी सुविधाएं किसानों को सीधे दे दे और उनसे रिजल्ट ले ले। सर्वाधिक शिकायत बैंकों के रवैये और फसल बीमा योजना को लेकर थी। कई किसानों ने तो इसे छलावा बता दिया।

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