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विभागों में बेकार पड़े चार अरब रुपये

संसाधनों के लिए दूसरों के आगे चिरौरी करने वाले राज्य के सरकारी विभागों में वर्षो से चार अरब रुपये बेकार पड़े हैं। लोक लेखा समिति ने इस ओर ध्यान दिलाया, तब वित्त विभाग की नींद खुली। अब जाकर उसने सभी विभागों से सिविल डिपोजिट में पड़ी राशि को वर्ष के अंत तक खर्च करने का आदेश दिया है। अगर राशि खर्च नहीं हुई तो विभागों को इसे ट्रेजरी में जमा कराना पड़ेगा लेकिन किसी भी हालत में यह राशि सिविल डिपोजिट में नहीं रहेगी। अगर अफसरों ने इस पर ध्यान दिया तो कल्याणकारी कार्यो के लिए सरकार को लगभग चार सौ करोड़ रुपए अपने-आप मिल जाएंगे। 


  वित्तीय लेखे वर्ष 2007-08 के अनुसार विभिन्न विभागों ने योजना मद और गैर योजना मद के 3 अरब 83 करोड़ 79 लाख 13 हजार रुपये कोषागार से निकाल कर सिविल डिपोजिट में रख दिये हैं। नतीजा इस राशि का न तो उपयोग हो रहा है और ना ही इस पर कोई ब्याज ही मिल रहा है। महालेखाकार ने विभागों और जिलों की इस हरकत पर पहले ही कड़ी नाराजगी जतायी थी। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई तो तब लोक लेखा समिति ने गत माह मुख्य सचिव अनूप मुखर्जी और वित्त विभाग के प्रधान सचिव भानु प्रताप शर्मा का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया। इसी आधार पर वित्त विभाग ने सभी विभागों के प्रधान सचिव, प्रमंडलीय आयुक्त और डीएम को राशि खर्च करने अथवा उसे ट्रेजरी में जमा कराने का आदेश दिया है।

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