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श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया निर्वाण उत्सव

श्री हरमिलाप मिशन के 11वें गुरू मुनि हरमिलापी का 18वां निर्वाण उत्सव हरमिलाप भवन में श्रद्धा और उल्लास के साथ उत्सव के रूप में मनाया गया। मिशन के 12वें गुरू मदन मोहन हरमिलापी ने सत्संग कर गुरू जी की वंदना की। उत्सव में देश के विभिनन नगरों से आए भक्तों ने श्रद्धासुमन अíपत किए। इस दौरान श्री हरमिलापी गुरू गाथा और रामायण के पाठ किए गए।


उत्सव में भक्त गुरूशरण हरमिलापी ने कहा कि सत्संग निराला अमृत है। उन्होंने कहा कि शरीर की खुराक भोजन है, तो आत्मा की खुराक भजन है। प्रत्येक आत्मा परमात्मा का अंश है। भक्त दयाल ने कहा कि गुरूदेव हरमिलापी महाराज ने सात दशकों तक सनातन संस्कृति की मर्यादाओं का प्रचार किया। उन्होंने बरेली में लक्ष्मी नारायण मंदिर बनवाकर अदभुत मिसाल कायम की। डा. श्याम सुंदरदास शास्त्री ने कहा कि आज देश को मुनि हरमिलापी जैसे संतों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि न हिन्दु बुरा है न मुसलमान बुरा है, जो बुराई करता है वह इंसान बुरा है।
स्वामी भगवतस्वरूप ने कहा कि हरमिलापी जी की शिक्षाएं समूची मानवता के लिए कल्याणकारी हैं। स्वामी हंसप्रकाश ने कहा कि सनातन धर्म की मर्यादाओं को सुरक्षित रखने में  सच्च संतों का भारी योगदान है। डा. विष्णु दत्त राकेश ने कहा कि सच्च पीर वही है, जो पर पीड़ा को दूर करे। बहन कांता, रामप्रकाश सेठी, पंडित तिलकराज कृष्णलाल राजपाल, धर्मचंद, ओमप्रकाश ने भी उत्सव को संबोधित किया। भाटिया, गुरदीप कुमार, प्रेम लूथरा, किशोर चुघ, ज्ञानचंद गंभीर ने संतों का स्वागत किया।

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  • Web Title:श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया निर्वाण उत्सव