class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

काउंसलिंग बढ़ाएगी अध्यापक-छात्रों के बीच तालमेल

अध्यापक को दोस्त मान अब छात्र अपने मन की व्यथा उनसे कह सकेंगे। प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर सरकारी स्कूलों के छात्रों की भी काउंसलिंग होगी। स्कूली छात्रों में बढ़ रही हिंसक प्रवृति को देखते हुए शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में परामर्श व्यवस्था अनिवार्य की है। इसके तहत अध्यापकों को युवा छात्र-छात्राओं के मन की उलझनों, परेशानियों, भावनाओं को सुन इनका समाधान ढूंढना है। इसका उद्देश्य छात्रों की हिचक दूर कर अध्यापकों के साथ उनका तालमेल बढ़ाना है।


सरकारी स्कूलों के नौवीं से बारवहीं कक्षा के छात्र-छात्राएं काउंसलिंग का लाभ उठा सकेंगे। वह युवावस्था के दौरान आने वाली परेशानियों के बारे में अध्यापकों से खुलकर बात कर सकेंगे। छात्रों द्वारा पूछे गए सभी सवालों का जवाब अध्यापक पूरी सहजता से देंगे। प्रश्न पूछने वाले छात्र यदि अपने नाम का खुलासा न करना चाहे, तो छात्र का नाम गुप्त ही रखा जाएगा ताकि छात्र और अभिभावक के बीच विश्वसनीयता बनी रहे। इतना ही नहीं,छात्र बिना नाम बताए पर्ची के माध्यम से भी प्रश्न पूछकर अपनी शंका का समाधन ढूंढ सकता है।


विभाग, स्टेट काउंसिल फॉर एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर (एससीईआरटी) के तहत इस शिक्षा सत्र से सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्रओं की काउंसलिंग शुरु करने जा रहा है। इसके लिए एससीईआरटी द्वारा तीन महीने पहले साइंस अध्यापकों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। साथ ही अध्यापकों को काउंसलिंग में आवश्यक सामग्री भी मुहैया कराई गई। छात्रों के लिए स्कूलों में काउंसलिंग की शुरुआत करने के लिए हाल ही में स्कूल प्रबंधकों की एनसीईआरटी गुड़गांव में बैठक भी आयोजित की गई। इस बैठक के दौरान स्कूल प्रबंधकों को काउंसलिंग के बारे में बताया गया।

स्कूलों में काउंसलिंग के नियम

- सालभर में 16 से 18 घंटे काउंसलिंग अनिवार्य
- 10 से 19 साल की उम्र के बच्चों की होगी काउंसलिंग
- नौवीं से बारहवीं कक्षा के छात्रों को काउंसलिंग देना जरुरी
- लड़कों की अध्यापक और लड़कियों की अध्यापिका करेगी काउंसलिंग
- बच्चों की शारीरिक, मानसिक विकास से जुड़ी समस्याओं का समाधान करना
काउंसलिंग का तरीका

- बच्चों का ग्रुप डिस्कसन कराना
- रोल प्लेइंग, नाटक के जरिए छात्रों की शंका का समाधान
- प्रश्न बॉक्स बनाकर छात्रों की समस्याओं को जानना
- ऐसे छात्र जो सामने आने से कतराते हैं, उन्हें इससे जोड़ना
- बच्चों को लाइव स्किल की जानकारी देना
- उनमें पॉजीटिव एटीट्यूट जगाना
- छात्र-छात्राओं में लिंग-भेद मिटाना

 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:काउंसलिंग बढ़ाएगी अध्यापक-छात्रों के बीच तालमेल