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गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में मतदान करना बाध्यकारी

गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में मतदान करना बाध्यकारी

गुजरात में स्थानीय निकाय के चुनाव में मतदान करना अनिवार्य कर दिया गया है। इस संबंध में गुजरात विधानसभा ने जरूरी कानून को हरी झंडी दे दी। इससे एक बार फिर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी विवादों में घिरते नजर आ रहे हैं।

गुजरात विधानसभा ने शनिवार को गुजरात निकाय प्राधिकार कानून (संशोधित) 2009 को पारित किया जिसके अनुसार अगर कोई मतदाता नियम में दिए गए कारणों के अलावा किसी अन्य कारण से मतदान करने में विफल रहता है तो उसे चूक करने वाला मतदाता घोषित कर दिया जाएगा और उसे इसके परिणाम भुगतने होंगे।  

मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि यह विवादित कानून नहीं है। इस तरह की कवायद पूरे विश्व के 32 देशों में चल रही है। इस पर बहस चल रही है इसलिए यह विवादित नहीं है। यह प्रजातंत्र को मजबूत करने के लिए है। 

इस ऐतिहासिक विधेयक देश में पहली बार स्थानीय निकाय चुनावों में मतदान को बाध्यकारी बनाया गया है। विधेयक को ध्वनि मत से पारित किया गया, जिसमें स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए सीटों पर आरक्षण 33 से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की भी बात है।

कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष ने अनिवार्य मतदान प्रावधान का विरोध करते हुए कहा कि यह संवैधानिक प्रावधानों के विरोधाभासी है। लेकिन उन्होंने स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए सीटें 33 से 50 प्रतिशत बढ़ाने का समर्थन किया।

विपक्ष ने महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण के लिए और स्थानीय निकायों में अनिवार्य मतदान के लिहाज से अलग-अलग विधेयकों की मांग की थी।

विधेयक के तहत यदि कोई मतदाता नियमों में निर्दिष्ट कारणों के अलावा अन्य किसी वजह से मतदान नहीं करता तो उसे डिफाल्टर वोटर घोषित किया जाएगा।

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