..आखिर कहाँ जाए विकलांग शिवा - ..आखिर कहाँ जाए विकलांग शिवा DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

..आखिर कहाँ जाए विकलांग शिवा

वर्षीय शिवा गौतम की गृहस्थी 20 दिन से सीढ़ी के नीचे बन गई है। सड॥क दुर्घटना में घायल होने के बाद उनको एक पैर गँवाना पड़ा। लेकिन उनके साथ तो और भी दर्द जुड़े हैं। हड्डी रोग और प्लास्टिक सर्जरी विभाग में बेड की कमी और अस्पताल में एक भी अच्छा रैन बसेरा न होने के बाद उनके लिए जीवन का संघर्ष और कठिन हो गया है।ड्ढr उन्नाव के रहने वाले शिवा का एक पैर एटा में हुई मार्ग दुर्घटना में बुरी तरह से जख्मी हो गया था। जनवरी में उसका एक पैर चिविवि के हड्डी रोग विभाग में काटना पड़ा। शिवा का कहना है कि 14 फरवरी को उसकी वार्ड से जबरन छुट्टी कर दी गई। डॉक्टरों ने कहा कि विभाग में बेड की कमी की वजह से उसकी छुट्टी की जा रही है। इसके बाद शिवा को हर हफ्ते तीन बार ड्रेसिंग करानी पड़ती है। उसके कटे हुए पैर की खाल प्लास्टिक सर्जरी विभाग में सही होना है। इस बीच शिवा सर्जिकल वार्ड को जाने वाली सीढ़ियों के नीचे ही 20 दिन से रहने को मजबूर है। शिवा का कहना है कि उसके पास इतना पैसा नहीं कि वह होटल या कहीं दूसरी जगह जाकर रह सके। हफ्ते में तीन दिन उन्नाव से अस्पताल आना भी संभव नहीं है। चिविवि में एक भी ऐसा रैन बसेरा नहीं है जहाँ मरीा व तीमारदार ठीक से रह सकें। लिहाजा उसने सिर छिपाने के लिए सीढ़ी के नीचे की ही जगह चुन ली। अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसएन शंखवार का कहना है कि बेहतर रैन बसेरा बनाने के उपाय किए जा रहे हैं।ड्ढr इनके निर्माण से मरीाों व तीमारदारों को राहत मिल सकेगी। अस्पताल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट व हड्डी रोग विभाग के डॉ. अजय सिंह का कहना है कि ऑपरेशन के बाद मरीा को महीनों तक वार्ड में नहीं रखा जा सकता। डॉ. सिंह का कहना है कि विभाग में 122 बेड हैं और यूपी समेत आसपास के अन्य राज्यों से भी प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीा यहाँ उपचार के लिए आते हैं। उनका कहना है कि पैर कटने के बाद ड्रेसिंग आदि में औसतन चार माह का वक्त लगता है। यदि इतने समय तक एक ही मरीा को वार्ड में रखा जाएगा तो इससे दूसरे मरीाों के लिए बेड नहीं बचेंगे।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: ..आखिर कहाँ जाए विकलांग शिवा