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दस साल बाद आया फैसला

उत्तर प्रदेश में बरेली की एक अदालत ने दस साल पहले की गई हत्या के मामले के एक अभियुक्त को आजीवन कारावास और पन्द्रह हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई।

अभियोजन पक्ष के अनुसार 14 सितम्बर 1999 की देर रात भुता क्षेत्र में सूरजपाल उर्फ पप्पू मोहनस्वरुप और बिहारीलाल ने फतेहचंद की रंजिशन गोली मारकर हत्या कर दी थी।
 
मामले की सुनवाई के बाद अपर सत्र न्यायाधीश विनय खरे की अदालत ने अभियुक्त पप्पू उर्फ सूरजपाल को दोषी ठहराते हुए कल शाम उम्रकैद तथा अर्थदंड की सजा सुनाई। मोहन स्वरुप को पहले ही सजा हो चुकी है जबकि मामले के एक अन्य अभियुक्त बिहारीलाल की मुकदमें के दौरान मौत हो गई थी

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