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परवान चढ़ने लगी है छोटे राज्यों के गठन की मांग

परवान चढ़ने लगी है छोटे राज्यों के गठन की मांग

उत्तर प्रदेश का बंटवारा कर बुंदेलखंड और पश्चिमांचल राज्य की मांग करने वाली मुख्यमंत्री मायावती ने प्रदेश में पूर्वांचल राज्य के गठन के लिए प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। मायावती ने प्रधानमंत्री को उत्तर प्रदेश को चार टुकड़ों में बांटने के लिए यह दूसरी चिट्ठी लिखी है।

वहीं आंध्र प्रदेश में चल रही राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए अलग विदर्भ राज्य की मांग भी जोर पकड़ने लगी है। वरिष्ठ कांग्रेसी सांसद विलास मुत्तमवार ने मौके को देखते हुए अलग विदर्भ राज्य पर दबाव बनाने के लिए प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी।

इस बीच आंध्र संकट का कोई समाधान नहीं होते देख तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रमुक नेता एम करुणानिधि ने इससे निपटने के तरीके की आलोचना की। उन्होंने राज्य के बंटवारे के लिए की जा रही मांग का खंडन किया। गौरतलब है कि पीएमके नेता एम रामदास ने राज्य के विभाजन की मांग की थी।

करुणानिधि ने चेन्नई में कहा कि तेलंगाना पर देरी से फैसला आया और जल्दबाजी में घोषणा हुई। इसी के चलते आंध्र प्रदेश में मौजूदा हालात पैद हुए हैं।

उधर, लखनऊ में अतिरिक्त कैबिनेट सचिव विजय शंकर पांडे ने संवाददाताओं से कहा कि मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर उनसे पृथक पूर्वांचल राज्य बनाने के लिए केंद्र से मंजूरी दिलाने और इस संबंध में संवैधानिक प्रक्रिया तेज करने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री ने बार-बार कहा है कि वह छोटे राज्यों के पक्ष में हैं और पृथक पूर्वांचल राज्य के गठन का समर्थन करती हैं।

छोटे राज्यों के अपने एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए मायावती ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर केंद्र से मांग की है कि वह तेलंगाना राज्य के गठन के लिए हुई पहल की तर्ज पर ही बुंदेलखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गठन की भी मंजूरी दे।

पांडे ने कहा कि मायावती ने अपने पत्र में कहा है कि पूर्वांचल का गठन बेहतर प्रशासनिक प्रबंधन और स्थानीय आबादी की आकांक्षाओं के मद्देनजर जरूरी है। मायावती ने अपने पत्र में यह रेखांकित किया कि उत्तर प्रदेश का पूर्वांचल क्षेत्र सामाजिक और आर्थिक रूप से काफी पिछड़ा है। नतीजतन वहां गरीबी है।

वहीं मुत्तेमवार ने नागपुर में कहा कि तेलंगाना के निर्माण से आंध्र प्रदेश दो तेलुगु राज्यों में बंट जाएगा। लिहाजा, दो मराठी भाषी राज्यों (महाराष्ट्र और विदर्भ) में भी कोई हर्ज नहीं है। इस बीच, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा के पूर्व नेता जसवंत सिंह की मरू प्रदेश की मांग को खारिज कर दिया।

गहलोत ने जयपुर में कहा कि राजस्थान के लोग सौहार्द में रह रहे हैं और उनके बीच भाईचारा है। सरकार ने हमेशा हर जिले में समान विकास लाने की कोशिश की है। इस मांग को उठाने का सवाल ही नहीं उठता।

छोटे राज्यों के गठन की मांग के बारे में सतर्कता भरी अपनी टिप्पणी में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा कि ऐसे मुद्दों पर फैसला करने से पहले लोगों की इच्छा पर भी गौर करना चाहिए।

उन्होंने इंदौर में कहा कि हालांकि मेरे लिए यह कहना मुश्किल है कि किस राज्य का गठन होना चाहिए और किसका नहीं, लेकिन मेरे विचार से हमें यह देखना चाहिए कि संबंधित क्षेत्र के लोगों की इस संबंध में क्या इच्छा है।
   
जबकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारक एमजी वैद्य ने कहा कि केंद्र को नए राज्य पुनर्गठन आयोग का गठन करना चाहिए ताकि पृथक राज्यों की मांगों से निपटा जा सके। आयोग की सिफारिशों को जनादेश के तौर पर स्वीकार करना चाहिए।

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